भाषा विश्वविद्यालय के शोध को मिली राष्ट्रीय पहचान: ‘साइबरक्राइम डिटेक्शन डिवाइस’ का डिज़ाइन हुआ पंजीकृत
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के विधि अध्ययन विभाग (Department of Legal Studies) के विभागाध्यक्ष एवं प्रख्यात शिक्षाविद् डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी के नेतृत्व में विकसित “Cybercrime Detection Device” के डिज़ाइन को भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा आधिकारिक रूप से पंजीकृत कर लिया गया है। यह उपलब्धि विश्वविद्यालय के शोध एवं नवाचार के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। पेटेंट कार्यालय, भारत सरकार द्वारा जारी Certificate of Registration of Design के अनुसार इस अभिनव डिवाइस का डिज़ाइन विधिवत रूप से पंजीकृत किया गया है। इस शोध कार्य में प्रो. (डॉ.) के.बी. अस्थाना, डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी, स्नेहल अस्थाना एवं डॉ. शिवली श्रीवास्तव का महत्वपूर्ण योगदान रहा है।
डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी इस आविष्कार के प्रमुख आविष्कारक (Inventor) हैं। यह Cybercrime Detection Device आधुनिक डिजिटल युग में बढ़ते साइबर अपराधों की रोकथाम एवं पहचान के लिए एक अत्यंत उपयोगी तकनीकी उपकरण है। यह डिवाइस रियल-टाइम डिटेक्शन, रोकथाम (Preventive Mechanism) तथा कानूनी अनुपालन (Legal Compliance) को ध्यान में रखते हुए तैयार किया गया है, जिससे साइबर अपराधों की त्वरित पहचान एवं प्रभावी कार्रवाई संभव हो सकेगी।
समाज एवं विषय के लिए लाभ:
यह डिवाइस समाज के लिए कई स्तरों पर उपयोगी सिद्ध होगा—
* साइबर अपराधों की शीघ्र पहचान कर नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।
* ऑनलाइन धोखाधड़ी, डेटा चोरी एवं डिजिटल फ्रॉड जैसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण में सहायक होगा।
* कानून प्रवर्तन एजेंसियों (Law Enforcement Agencies) को साक्ष्य एकत्र करने एवं जांच प्रक्रिया को सुदृढ़ करने में मदद करेगा।
* डिजिटल प्लेटफॉर्म पर सुरक्षित वातावरण स्थापित करने में योगदान देगा।
* विधि (Law) एवं साइबर सुरक्षा (Cyber Security) के क्षेत्र में शोध एवं शिक्षण को नई दिशा प्रदान करेगा।
यह नवाचार न केवल तकनीकी दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसका गहरा संबंध विधिक अध्ययन (Legal Studies) से भी है, क्योंकि यह साइबर कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होगा।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह नवाचार विश्वविद्यालय की शोध क्षमता और गुणवत्ता को दर्शाता है। उन्होंने डॉ. पियूष कुमार त्रिवेदी एवं उनकी टीम को बधाई देते हुए कहा कि यह डिवाइस समाज में साइबर सुरक्षा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
विश्वविद्यालय परिवार एवं अकादमिक जगत में इस उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त किया जा रहा है और इसे डिजिटल सुरक्षा एवं विधिक अध्ययन के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।