भाषा विवि के अवध इन्क्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस पर हुआ “आईपीआर प्रबंधन” विषय पर विशेष व्याख्यान का आयोजन
विश्व बौद्धिक संपदा अधिकार दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (केएमसीएलयू) के अवध इन्क्यूबेशन फाउंडेशन द्वारा विश्वविद्यालय परिसर में आज “आईपीआर प्रबंधन” विषय पर एक विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम अवध इन्क्यूबेशन फाउंडेशन के उपाध्यक्ष प्रो. सैयद हैदर अली के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का समन्वयन विधि अध्ययन संकाय के सहायक प्राध्यापक डॉ. प्रशांत वरुण ने किया, जबकि सत्र का आयोजन विधि अध्ययन संकाय के ही सहायक प्राध्यापक डॉ. आशीष शाही द्वारा किया गया।
अवध इन्क्यूबेशन फाउंडेशन की मुख्य परिचालन अधिकारी (सीओओ) डॉ. दोआ नक़वी ने अपने संबोधन में बौद्धिक संपदा अधिकारों और संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों (SDGs) के बीच महत्वपूर्ण संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रभावी आईपीआर प्रबंधन, एसडीजी 9: उद्योग, नवाचार एवं अवसंरचना तथा एसडीजी 8: सम्मानजनक कार्य और आर्थिक वृद्धि की प्राप्ति के लिए अत्यंत आवश्यक है। “आईपीआर संरक्षण नवाचार को प्रोत्साहित करता है, सृजनकर्ताओं को उचित प्रतिफल सुनिश्चित करता है और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देता है,” डॉ. नक़वी ने कहा। मुख्य अतिथि के रूप में डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के एसोसिएट प्रोफेसर डॉ. विकास भाटी ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। अपने मुख्य व्याख्यान में उन्होंने बौद्धिक संपदा अधिकारों की मूल अवधारणाओं, उनके क्रियान्वयन की प्रक्रिया, व्यावहारिक लाभों तथा विभिन्न प्रकारों की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों में आईपी जागरूकता संस्कृति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।आमंत्रित वक्ता के रूप में सिल्वर आईपी के संस्थापक निदेशक श्री ज़फर अहमद ने सहभागिता की। उन्होंने पेटेंट फाइलिंग की प्रक्रिया, आवश्यक दस्तावेज़ों तथा नवोन्मेषकों और शोधकर्ताओं के लिए पेटेंट संरक्षण की रणनीतिक पहलुओं पर विस्तृत जानकारी साझा की। इस अवसर पर प्रो. सैयद हैदर अली ने नवाचार और इन्क्यूबेशन की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि बौद्धिक संपदा को बाज़ार-उन्मुख समाधानों में परिवर्तित करने में इनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने छात्रों एवं संकाय सदस्यों को अनुसंधान के व्यावसायीकरण के लिए इन्क्यूबेशन सेंटर का अधिकाधिक उपयोग करने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में विभिन्न विभागों के छात्र-छात्राओं, शोधार्थियों एवं संकाय सदस्यों की सक्रिय भागीदारी रही। व्याख्यानों के उपरांत एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र आयोजित किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने वास्तविक जीवन से जुड़े बौद्धिक संपदा के मुद्दों और संभावनाओं पर चर्चा की।
कार्यक्रम का समापन डॉ. आशीष शाही द्वारा प्रस्तुत धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने सभी वक्ताओं, विश्वविद्यालय प्रशासन, आयोजन टीम तथा प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। अवध इन्क्यूबेशन सेंटर भविष्य में भी ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से आईपी पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने तथा नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।