डिग्री के साथ चरित्र और संवेदना को जीवन का आधार बनाएं युवाः संजय श्रीनेत

Update: 2026-08-12 14:23 GMT



अयोध्या। अवध विश्वविद्यालय के 31 वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग, प्रयागराज के अध्यक्ष श्री संजय श्रीनेत ने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल उपाधि प्राप्त करने का अवसर नहीं, बल्कि उत्तरदायित्वपूर्ण जीवन के शुभारंभ का पर्व है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे ज्ञान के साथ चरित्र, सफलता के साथ विनम्रता और तकनीकी दक्षता के साथ मानवीय संवेदना को अपने जीवन का आधार बनाएं। उन्होंने कहा कि डिग्री योग्यता का प्रमाण हो सकती है, लेकिन चरित्र ही व्यक्ति की विश्वसनीयता और महानता का आधार बनता है। दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए श्री संजय श्रीनेत ने कुलाधिपति एवं उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल के नेतृत्व, साहस, सेवा और कर्तव्यनिष्ठा की सराहना की। उन्होंने कहा कि उनका जीवन नारी शक्ति, संवेदनशील नेतृत्व और राष्ट्रसेवा का प्रेरक उदाहरण है। कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथियों, कुलपति, कार्यपरिषद एवं विद्वत परिषद के सदस्यों, शिक्षकों, अभिभावकों और उपाधि प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को उन्होंने शुभकामनाएं दीं। श्रीनेत ने विश्वविद्यालय की उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि कुलपति के दूरदर्शी नेतृत्व में विश्वविद्यालय ने अपने 52वें वर्ष में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियां हासिल की हैं-नैक की मान्यता प्रक्रिया में प्रगति, शोध एवं पीएचडी कार्यक्रमों में गुणात्मक वृद्धि, डिजिटल शिक्षा एवं ऑनलाइन परीक्षाओं में पारदर्शिता, खेल एवं सांस्कृतिक गतिविधियों में राष्ट्रीय स्तर की उपलब्धियां तथा न्यू एज इन्क्यूबेशन सेंट्रर के माध्यम से स्टार्टअप संस्कृति को बढ़ावा देना उल्लेखनीय है। उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप नए पाठ्यक्रमों और बहुविषयक दृष्टिकोण को भी महत्वपूर्ण बताया।

युवाओं को जीवन के सात सूत्र देते हुए उन्होंने धैर्य, निरंतर सीखने, चरित्र, विनम्रता एवं संवेदनशीलता, संबंधों के सम्मान, कठिनाइयों को अवसर में बदलने तथा उद्देश्य के प्रति समर्पण को सफलता का आधार बताया। उन्होंने कहा कि असफलता अंत नहीं, बल्कि अनुभव का विश्वविद्यालय है। प्रकृति से सीखने की प्रेरणा देते हुए उन्होंने कहा कि बीज का मिट्टी में दबना उसका अंत नहीं, बल्कि विशाल वृक्ष बनने की तैयारी है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव पर उन्होंने कहा कि आज के युवाओं को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के साथ मोरल इंटेलिजेंस और नेचुरल इंटेलिजेंस का भी विकास करना होगा। मशीनें सूचना और गणना दे सकती हैं, लेकिन करुणा, विवेक, नैतिक साहस और मानवीय संवेदना मनुष्य की विशिष्ट शक्ति हैं। उन्होंने कहा कि भविष्य उन्हीं का होगा, जिनके पास उच्च तकनीकी के साथ उच्च कोटि की मानवता होगी।

श्री संजय श्रीनेत ने युवाओं से वर्ष 2047 के विकसित भारत के निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि भारत का भविष्य केवल सरकारों और नीतियों से नहीं, बल्कि युवाओं के विचार, कर्म और चरित्र से तय होगा। शिक्षा का अंतिम लक्ष्य केवल रोजगार नहीं, बल्कि अज्ञान, भय, अहंकार, संकीर्णता और अन्याय से मुक्ति दिलाना होना चाहिए। अंत में उन्होंने युवाओं को संकल्प दिलाया कि वे ज्ञान प्राप्त करेंगे, लेकिन अहंकार नहीं, सफलता हासिल करेंगे, लेकिन संवेदना नहीं खोएंगे, ऊंचाइयों तक पहुंचेंगे, लेकिन अपनी जड़ों को नहीं भूलेंगे तथा अधिकारों के साथ कर्तव्यों का भी निष्ठापूर्वक पालन करेंगे।

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