शिक्षा को संस्कार, रोजगार और तकनीक से जोड़कर विकसित भारत के निर्माण में दें योगदानः योगेंद्र उपाध्याय
अयोध्या। डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31वें दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि एवं उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि उच्च शिक्षा की दिशा और दशा में व्यापक परिवर्तन आया है। आज उच्च शिक्षा का विस्तार देश के प्रत्येक प्रदेश में हो चुका है और युवाओं के लिए शिक्षा के नए अवसर उपलब्ध हुए हैं। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देते हुए कहा कि यह उपलब्धि केवल विद्यार्थियों की नहीं, बल्कि उनके माता-पिता और गुरुजनों के त्याग, संघर्ष एवं मार्गदर्शन का भी परिणाम है।
उच्च शिक्षा मंत्री ने कहा कि अयोध्या केवल एक शहर नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, स्वाभिमान और अस्मिता का प्रतीक है। पांच सौ वर्षों तक चले सतत संघर्ष के बाद अयोध्या आज अपने गौरवशाली स्वरूप में विश्व के सामने है। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीराम की जन्मभूमि अयोध्या भारतीय संस्कृति और आस्था का केंद्र है। ऐसे ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिवेश में स्थापित डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय से उपाधि एवं मेडल प्राप्त करना विद्यार्थियों के लिए गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि दीक्षांत समारोह केवल शिक्षांत नहीं है, बल्कि यह जीवन में प्राप्त शिक्षा को समाज और राष्ट्र के हित में उपयोग करने का संकल्प लेने का अवसर भी है। विद्यार्थियों को अपने गौरवशाली इतिहास और भारतीय संस्कृति को सदैव स्मरण रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत की संस्कृति ने सदैव पूरे देश को एक सूत्र में बांधने का कार्य किया है। भगवान श्रीराम ने उत्तर से दक्षिण तक, भगवान श्रीकृष्ण ने पश्चिम से पूर्वोत्तर तक सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया, जबकि भगवान शिव के ज्योतिर्लिंग और शक्तिपीठ देश की एकता एवं अखंडता के प्रतीक हैं।
श्री उपाध्याय ने कहा कि विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ संस्कार, रोजगारपरक कौशल और आधुनिक तकनीक से भी जोड़ना आवश्यक है। संस्कारविहीन शिक्षा समाज के लिए उपयोगी नहीं हो सकती। उन्होंने युवाओं से राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विकसित भारत के संकल्प को साकार करने में शिक्षा की महत्वपूर्ण भूमिका है। आधारभूत संरचना के विकास के साथ ज्ञान, कौशल, तकनीक और संस्कार से युक्त युवा ही भारत को विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दे सकते हैं। उन्होंने उपाधि एवं पदक प्राप्त करने वाले सभी विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।