अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस पर ‘युवा, आध्यात्म तथा राष्ट्रनिर्माण में उनकी सहभागिता’ विषयक कार्यक्रम आयोजित

Update: 2026-08-12 14:31 GMT


कानपुर, 12 अगस्त 2026। श्रीमद् भगवद्गीता वैदिक शोधपीठ तथा आर्य युवाशक्ति दल के संयुक्त तत्वावधान में अंतरराष्ट्रीय युवा दिवस के अवसर पर कानपुर विश्वविद्यालय परिसर स्थित तात्या टोपे सीनेट सभागार में “युवा, आध्यात्म तथा राष्ट्रनिर्माण में उनकी सहभागिता” विषय पर विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कानपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री उमेश पालीवाल जी ने की।

कार्यक्रम का शुभारंभ युवाओं को आध्यात्म, संस्कार, संस्कृति एवं राष्ट्रनिर्माण से जोड़ने के उद्देश्य से किया गया। गीता शोधपीठ के सह-निदेशक अनिल गुप्ता ने शोधपीठ के उद्देश्यों, कार्यों एवं विभिन्न गतिविधियों के बारे में उपस्थित अतिथियों एवं युवाओं को विस्तार से जानकारी दी तथा शोध एवं वैदिक ज्ञान के संरक्षण एवं प्रसार में शोधपीठ की भूमिका पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम की मुख्य वक्ता प्रियंका पराशर जी ने अपनी प्रभावशाली कविताओं के माध्यम से युवाओं में राष्ट्रप्रेम, आध्यात्मिक चेतना एवं सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना को जागृत किया। उनके द्वारा प्रस्तुत स्वरचित रचनाओं ने उपस्थित श्रोताओं को भावविभोर कर दिया। उनके द्वारा प्रस्तुत गीत ‘हम देखेंगे’ को भी उपस्थित दर्शकों ने खूब सराहा।

इस अवसर पर CDC प्रो. राजेश कुमार द्विवेदी ने भी अपने व्याख्यान में युवाओं को संबोधित करते हुए उनके जीवन में सकारात्मक सोच, संस्कार, अनुशासन एवं राष्ट्र के प्रति जिम्मेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला और युवाओं को देश के भविष्य के रूप में अपनी भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम के संयोजक ऋषभ श्रीवास्तव ने कार्यक्रम के उद्देश्य एवं उसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि युवा शक्ति किसी भी राष्ट्र की सबसे बड़ी ऊर्जा है। यदि युवाओं को आध्यात्म, संस्कार, संस्कृति और राष्ट्रहित की सही दिशा प्रदान की जाए, तो वे भारत को सशक्त, समृद्ध एवं विकसित राष्ट्र बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

कार्यक्रम में कानपुर विश्वविद्यालय के उपकुलपति प्रो.सुधीर कुमार अवस्थी ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए युवाओं की भूमिका, उनके दायित्व एवं राष्ट्रनिर्माण में उनकी सक्रिय सहभागिता के महत्व पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में अध्यक्षीय उद्बोधन डा. उमेश पालीवाल द्वारा दिया गया। उन्होंने युवाओं को भारतीय संस्कृति, आध्यात्मिक मूल्यों एवं राष्ट्रहित से जुड़कर कार्य करने का आह्वान किया तथा कहा कि युवा केवल देश का भविष्य ही नहीं, बल्कि वर्तमान की भी महत्वपूर्ण शक्ति हैं।

कार्यक्रम के समापन अवसर पर युवाओं को पौधे भेंट किए गए, जिसके माध्यम से उन्हें प्रकृति एवं पर्यावरण संरक्षण के प्रति अपने कर्तव्यों का बोध कराया गया। इस पहल के माध्यम से युवाओं को यह संदेश दिया गया कि राष्ट्रनिर्माण केवल विचारों एवं भाषणों तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रकृति, पर्यावरण और समाज के प्रति जिम्मेदार आचरण भी राष्ट्रसेवा का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

कार्यक्रम ने युवाओं में आध्यात्मिक चेतना, राष्ट्रप्रेम, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं पर्यावरण संरक्षण की भावना को मजबूत करने का सार्थक संदेश दिया।इस अवसर पर विनय मिश्र, डा.अमित कुमार, डा.रामकिशोर, डा.शशिकांत त्रिपाठी,डा.हिमान्शु त्रिवेदी ,अशोक तिवारी आदि उपस्थित रहे।

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