महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा शुक्रवार को ‘भारत विभाजन 1947: राजनीति, राष्ट्रवाद और मानवीय त्रासदी’ विषय पर ऑनलाइन व्याख्यान आयोजित किया गया।
इतिहास से सीख, भविष्य के लिए प्रेरणा
कार्यक्रम की मुख्य वक्ता पूर्व कुलपति प्रो. मानुका खन्ना ने कहा कि 1947 का विभाजन केवल नक्शे पर खींची रेखाएं नहीं थीं। इसके साथ लाखों लोगों ने विस्थापन, हिंसा और अपनों को खोने की पीड़ा झेली। उन्होंने कहा, "विभाजन के इतिहास को संवेदनशीलता और तथ्यों के साथ समझना होगा, ताकि नई पीढ़ी इससे प्रेरणा लेकर सामाजिक समरसता, शांति और मानवीय मूल्यों को और मजबूत कर सके।"
राष्ट्रवाद और एकता का संदेश
चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ के राजनीति विज्ञान विभाग के डॉ. मुकेश कुमार ने विभाजन की राजनीतिक पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद के आयामों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि इतिहास की त्रासद घटनाओं को याद करने का उद्देश्य समाज में विभाजन पैदा करना नहीं, बल्कि उनसे सबक लेकर लोकतांत्रिक मूल्यों और राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करना है। इतिहास हमें जोड़ने के लिए पढ़ना चाहिए, तोड़ने के लिए नहीं।
कुलपति का उद्बोधन
कार्यक्रम के संरक्षक एवं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि ऐसे अकादमिक आयोजन विद्यार्थियों को इतिहास के महत्वपूर्ण अध्यायों को गंभीरता से समझने और उनसे जीवन-मूल्य सीखने का अवसर देते हैं। विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस हमें यह याद दिलाता है कि देश की एकता और अखंडता सर्वोपरि है।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी एवं विद्यार्थी ऑनलाइन माध्यम से जुड़े। व्याख्यान के माध्यम से विभाजन की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि, राजनीतिक विमर्श और मानवीय सरोकारों पर सार्थक संवाद हुआ।
विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित यह व्याख्यान विद्यार्थियों के लिए केवल इतिहास की जानकारी नहीं, बल्कि एकता, सौहार्द और राष्ट्रभक्ति की प्रेरणा का स्रोत बना।