बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के बायोकैमिस्ट्री विभाग में एक-सप्ताह के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का शुभारंभ
झांसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झांसी के बायोकैमिस्ट्री विभाग में नवप्रवेशित बी.एससी. एवं एम.एससी. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों के स्वागत, परिचय एवं मार्गदर्शन के उद्देश्य से एक-सप्ताह की ओरिएंटेशन कार्यक्रम श्रृंखला का शुभारंभ किया गया।
कार्यक्रम के माध्यम से विद्यार्थियों को विश्वविद्यालय एवं विभाग के शैक्षणिक परिवेश, शिक्षण-पद्धति, शोध एवं नवाचार की संभावनाओं तथा उच्च शिक्षा और रोजगार के विविध अवसरों से परिचित कराया जा रहा है।
कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी के पैथोलॉजी विभाग के प्रोफेसर एवं प्रधानाचार्य डॉ. मयंक सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। महारानी लक्ष्मीबाई मेडिकल कॉलेज, झांसी के कम्युनिटी एवं फैमिली मेडिसिन विभाग की असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. सुधा शर्मा विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। वहीं प्रो. आलोक कुमार वर्मा, डीन, फैकल्टी ऑफ साइंस कार्यक्रम के संयोजक रहे।
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि द्वारा दीप प्रज्वलन के साथ किया गया। दीप प्रज्वलन ज्ञान, शिक्षा एवं प्रकाश का प्रतीक है और इसी के साथ विद्यार्थियों के विश्वविद्यालयी जीवन की एक नई शुरुआत हुई। इस अवसर पर नवप्रवेशित विद्यार्थियों का बायोकैमिस्ट्री विभाग में गर्मजोशी से स्वागत किया गया।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, बायोकैमिस्ट्री विभाग के समन्वय में किया गया।
उद्घाटन सत्र में अनुभव साझा करने का अवसर में एम.एससी. प्रथम सेमेस्टर के छात्र जीशान अंसारी और छात्रा आन्या ने विश्वविद्यालय एवं विभाग में प्रवेश के बाद के अपने प्रारंभिक अनुभव साझा किए। एम.एससी. फाइनल ईयर के छात्र सक्षम गुप्ता ने बी.एससी. से लेकर एम.एससी. तक के अपने सफर को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान प्राप्त अनुभवों ने उनके शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ उनके व्यक्तिगत विकास में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने नए विद्यार्थियों को विभागीय गतिविधियों में सक्रिय रूप से भाग लेने, शिक्षकों के साथ संवाद बनाए रखने तथा विश्वविद्यालय में उपलब्ध अवसरों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए डॉ. मयंक सिंह ने जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच के महत्व पर विशेष जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों से बार-बार यह कहा कि उन्हें हर बात को केवल स्वीकार करने के बजाय यह जानने की आदत विकसित करनी चाहिए कि “ऐसा क्यों हो रहा है?” और “हमें ऐसा क्यों करना है?”। उन्होंने कहा कि सवाल पूछना सीखने की प्रक्रिया का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है और विद्यार्थियों को प्रश्न पूछने, चीजों को समझने तथा उनके पीछे के कारणों को जानने में कभी संकोच नहीं करना चाहिए।
डॉ. मयंक सिंह ने विद्यार्थियों को विश्वविद्यालयी जीवन को समर्पण, जिज्ञासा, अनुशासन और निरंतरता के साथ आगे बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने, पढ़ाई में नियमितता बनाए रखने तथा शोध एवं व्यावसायिक अवसरों को तलाशने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने विद्यार्थियों को अपने लिए स्पष्ट एवं सार्थक लक्ष्य निर्धारित करने तथा उन्हें प्राप्त करने के लिए लगातार मेहनत करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयी जीवन केवल डिग्री प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ज्ञान, कौशल, आत्मविश्वास और भविष्य के लिए सही दृष्टिकोण विकसित करने का भी महत्वपूर्ण समय है।
विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा शर्मा ने भी विद्यार्थियों के साथ संवाद किया और उनके सर्वांगीण विकास के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने विद्यार्थियों को शैक्षणिक ज्ञान के साथ-साथ प्रभावी संचार कौशल, आत्मविश्वास, व्यावसायिक नैतिकता और सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने स्कूल जीवन और कॉलेज जीवन के बीच के अंतर को समझाते हुए बताया कि विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को अधिक स्वतंत्रता के साथ-साथ अधिक जिम्मेदारियां भी प्रदान करता है।
कार्यक्रम के सफल आयोजन में एर. अंजलि छोंकर, सुश्री दिव्या जैन, शैलेश सोनी तथा राकेश जैन का महत्वपूर्ण सहयोग रहा। विभाग के शिक्षकों ने नवप्रवेशित विद्यार्थियों का स्वागत करते हुए उन्हें एक बेहतर एवं सहयोगात्मक शैक्षणिक तथा शोध वातावरण उपलब्ध कराने के लिए विभाग की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
उद्घाटन सत्र में विभिन्न विभागों के कई प्रतिष्ठित शिक्षक भी रिसोर्स पर्सन के रूप में उपस्थित रहे और विद्यार्थियों के साथ अपने अनुभव एवं विशेषज्ञता साझा की। माइक्रोबायोलॉजी विभाग से विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र मणि त्रिपाठी के साथ डॉ. ऋषि सक्सेना, डॉ. पंकज कुमार सागर, डॉ संजय कुमार, डॉ. संगीता लाल एवं डॉ. रंजना भाटी उपस्थित रहे।
फूड टेक्नोलॉजी विभाग से डॉ. शुभांगी निगम ने कार्यक्रम में सहभागिता की। वहीं शिक्षा विभाग से डॉ. दीप्ति सिंह उपस्थित रहीं। हिंदी डिपार्टमेंट से डॉ अचला पाण्डेय उपस्थित रहीं। डॉ. शिल्पा मिश्रा ने अर्थशास्त्र एवं वित्त और विकास अध्ययन विभाग का प्रतिनिधित्व किया तथा रिसोर्स पर्सन के रूप में भी कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। सभी विशिष्ट रिसोर्स पर्सन्स का स्वागत एवं सम्मान किया गया।
कार्यक्रम के अंत में डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव, विभागाध्यक्ष, बायोकैमिस्ट्री विभाग द्वारा धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया गया। उन्होंने कार्यक्रम के आयोजन में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सहयोग करने वाले सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
उद्घाटन समारोह के अंत में मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि को स्मृति-चिह्न (मोमेंटो) भेंट कर सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि डॉ. मयंक सिंह को स्मृति-चिह्न डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव एवं रमेश कुमार द्वारा भेंट किया गया। वहीं विशिष्ट अतिथि डॉ. सुधा शर्मा को स्मृति-चिह्न डॉ. सुमिरन श्रीवास्तव एवं रमेश कुमार द्वारा प्रदान किया गया। डॉ. शाइना कलीम ने भी अतिथियों के सम्मान एवं अभिनंदन समारोह में सहभागिता की।
एक-सप्ताह के ओरिएंटेशन कार्यक्रम का पहला दिन उत्साह एवं सकारात्मक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। इस दौरान नवप्रवेशित विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित शिक्षाविदों एवं विशेषज्ञों से महत्वपूर्ण जानकारी, मार्गदर्शन और प्रेरणा प्राप्त हुई। विद्यार्थियों को विभाग के शैक्षणिक वातावरण से परिचित होने, विश्वविद्यालयी जीवन की जिम्मेदारियों को समझने तथा आगे की शैक्षणिक यात्रा के लिए स्वयं को तैयार करने का अवसर मिला।
ओरिएंटेशन कार्यक्रम के आगामी सत्रों में विद्यार्थियों को शैक्षणिक गतिविधियों, शोध, करियर विकास, व्यावसायिक कौशल तथा बहुविषयक अवसरों सहित विश्वविद्यालय में उपलब्ध विभिन्न संभावनाओं से परिचित कराया जाएगा। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों को उनके विश्वविद्यालयी जीवन की शुरुआत आत्मविश्वास, स्पष्ट सोच, जिज्ञासा और उत्साह के साथ करने के लिए प्रेरित करना है।