झाँसी। बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग में आयोजित ‘अटल 2026’ व्याख्यान श्रृंखला के अंतर्गत पूर्व छात्रों ने विद्यार्थियों को शोध, नवाचार, उत्पाद विकास और आधुनिक औद्योगिक तकनीकों की बारीकियों से परिचित कराया। विशेषज्ञों ने अपने व्यावहारिक अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों को उद्योग जगत की बदलती आवश्यकताओं और तकनीकी क्षेत्र में करियर की संभावनाओं से अवगत कराया।

विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (आईईटी) के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं इंस्ट्रूमेंटेशन इंजीनियरिंग विभाग के स्टूडेंट क्लब द्वारा 14 से 24 अक्टूबर के बीच ‘अटल 2026’ (Alumni Talk, Address & Lecture Series) के अंतर्गत तीन विशेष व्याख्यान आयोजित किए गए।

व्याख्यान श्रृंखला में विभाग के पूर्व छात्र डॉ. स्वामीनाथ मौर्य (बैच 2007-11) ने ‘फ्रॉम आइडिया टू प्रोडक्ट डेवलपमेंट’ विषय पर विचार रखते हुए विद्यार्थियों को नवाचार और किसी विचार को व्यावहारिक उत्पाद में विकसित करने की प्रक्रिया से परिचित कराया।

वहीं, इंजीनियर सयंतन दास (बैच 2007-11) ने ‘स्मार्ट इंस्ट्रूमेंटेशन इन ऑयल एंड गैस इंडस्ट्री’ विषय पर तेल एवं गैस उद्योग में आधुनिक उपकरणों, स्वचालन और स्मार्ट इंस्ट्रूमेंटेशन की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। इंजीनियर पुष्पाकर यादव (बैच 2012-16) ने ‘स्ट्रक्चर ऑफ बेवरेज (एसेप्टिक लाइन) विद इंडस्ट्री 4.0 एंड आईआईओटी’ विषय पर व्याख्यान देते हुए पेय पदार्थ उद्योग में आधुनिक उत्पादन प्रणालियों, औद्योगिक स्वचालन और इंटरनेट आधारित तकनीकों की जानकारी दी।

विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को तकनीकी ज्ञान के साथ व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। व्याख्यानों के माध्यम से विद्यार्थियों को औद्योगिक प्रक्रियाओं, नई तकनीकों और कार्यक्षेत्र की वास्तविक चुनौतियों को समझने का अवसर मिला।

कार्यक्रम का समन्वय इंजीनियर नेहा जैन ने किया, जबकि सत्रों का संचालन एलुमनाई अफेयर्स कोऑर्डिनेटर इंजीनियर इकरूप वर्मा ने किया। आयोजन में विद्यार्थी समन्वयकों शुभ्रा यादव, शुभाशिनी द्विवेदी, सुमित, राघव कौशिक, आदित्य कुमार यादव, योगेश अहिरवार, सोनी वर्मा, दिव्यांशी, दीपक कुमार गुप्ता एवं गौरव यादव का विशेष योगदान रहा।

अटल व्याख्यान श्रृंखला का उद्देश्य पूर्व छात्रों के अनुभवों का लाभ वर्तमान विद्यार्थियों तक पहुंचाना, उन्हें उद्योग जगत की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना तथा शैक्षणिक ज्ञान और औद्योगिक अनुभव के बीच की दूरी को कम करना है।