आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में राजनीति विज्ञान विभाग के प्रभारी सूर्य प्रकाश अग्रहरि के संयोजन में राष्ट्रीय एकता दिवस शनिवार को धूमधाम से मनाया गया। "अखंड भारत के शिल्पकार : सरदार पटेल" विषयक कार्यक्रम के तहत अखंड विथिका एवं सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा का अनावरण किया गया।

कार्यक्रम के संरक्षक कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अपने संदेश में कहा कि सरदार पटेल का जीवन राष्ट्रीय एकता का अप्रतिम उदाहरण है। सरदार पटेल ने हमें सिखाया कि जब तक देश एक नहीं होगा, तब तक विकास संभव नहीं है। विश्वविद्यालय में स्थापित अखंड विथिका छात्रों को भारत की सांस्कृतिक एकता और विविधता में एकता का बोध कराएगी। मैं राजनीति विज्ञान विभाग के इस प्रयास की सराहना करता हूँ।

मुख्य अतिथि प्रो. मनोज दीक्षित ने सरदार पटेल के योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा, "सरदार पटेल को लौह पुरुष यूं ही नहीं कहा जाता। आजादी के बाद देश 562 रियासतों में बंटा हुआ था। कई रियासतें भारत में विलय को तैयार नहीं थीं। सरदार पटेल ने अपनी कूटनीति, दृढ़ता और साहस से सभी रियासतों का भारतीय संघ में विलय कराया। हैदराबाद में ऑपरेशन पोलो और जूनागढ़ का विलय उनकी निर्णायक क्षमता का प्रमाण है।" उन्होंने आगे कहा, "पटेल ने देश को केवल राजनीतिक रूप से ही एक नहीं किया, बल्कि प्रशासनिक रूप में भी मजबूत किया। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की नींव उन्हीं की देन है, जिसे उन्होंने स्टील फ्रेम ऑफ इंडिया कहा था। उनका मानना था कि एक मजबूत नौकरशाही ही एकीकृत भारत को संभाल सकती है। आज युवाओं को उनके इसी राष्ट्र प्रथम के विचार को अपनाने की जरूरत है।"

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रो. दीक्षित का स्वागत कुलसचिव अमृत लाल ने स्मृति चिह्न और अंगवस्त्रम देकर किया। विभाग द्वारा प्रकाशित पुस्तक भी भेंट की गई।

कुलसचिव अमृत लाल ने कहा, "विश्वविद्यालय राष्ट्र निर्माण की प्रयोगशाला है। यह प्रतिमा छात्रों को कर्तव्य बोध कराएगी।"

स्वागत भाषण तृषिका श्रीवास्तव ने दिया, जबकि कार्यक्रम का संचालन वैशाली सिंह ने किया। इस अवसर पर आयोजित प्रतियोगिताओं में *शोध लेख में उपासना विश्वकर्मा, देवेश उपाध्याय, आकांक्षा पाण्डेय, प्रतिष्ठा चतुर्वेदी, नंदिनी यादव, फ़रहत जहाँन, अमरजीत को दिया गया। इसके साथ ही पोस्टर प्रतियोगिता में शिवाशीष सोनी, सिरोन, सलोनी, श्रेया, दीपक, शिवांगी को भी पुरस्कृत किया गया।

सरदार पटेल की भव्य प्रतिमा का निर्माण दृश्य कला विभाग के डॉ. गुलशन सोनकर और उनके विद्यार्थियों द्वारा किया गया है। अंत में धन्यवाद ज्ञापन संयोजक सूर्य प्रकाश अग्रहरि ने किया।