दिवाली पर तमाम प्रयासों के बावजूद दिल्ली में पिछले साल की तुलना में इस साल दिवाली में प्रदूषण का स्तर रहा ऊंचा......

The people of India celebrate the festival of light as a victory of good over evil forces.

Update: 2020-11-16 14:00 GMT


दिल्ली में पिछले साल की तुलना में इस साल दिवाली में प्रदूषण का स्तर ऊंचा रहा और इसकी वजह पराली का बहुत अधिक जलाया जाना एवं इस त्योहारी सीजन में प्रतिकूल मौसम दशा हो सकती है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) ने यह जानकारी दी। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने पिछले साल और इस साल की दिवाली के आंकड़े जारी किए। सीपीसीबी (CPCB) ने बताया कि दिल्ली में हर पैमाने पर पिछले साल की तुलना में अधिक प्रदूषण रहा। पीतमपुरा में पीएम 2.5 और एसओ2 के आंकड़े डराने वाले रहे। रात करीब 1 बजे पूरी दिल्ली में प्रदूषण सबसे ज्यादा दर्ज किया गया। पीएम 10 और पीएम2.5 दिवाली के दिन 645जीएम3 और 483जीएम3 दर्ज किया गया गया।

बता दें कि इससे पहले एनजीटी ने पूरे देश में पटाखों के जलाने और बेचने पर प्रतिबंध लगाया था। हालांकि उन राज्यों को 2 घंटे ग्रीन पटाखे जलाने की अनुमति दी गई थी जहां वायु की गुणवत्ता सही हो। इस निर्देश के बावूजद दीवाली पर चोरी-छिपे पटाखे फोड़े गए। नतीजा यह रहा है कि अन्य दिनों की अपेक्षा दीवाली के दिन सबसे ज्यादा प्रदूषण बढ़ा। इससे पहले लगातार लोगों को सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। दीपावली पर जलाए गए पटाखों से अगले दिन प्रदूषण खतरनाक श्रेणी में पहुंच गया था। इसके बाद रविवार अचानक हुई बारिश ने लोगों की परेशानियों को कम करने का काम किया है। वहीं उत्तर भारत के कई राज्यों में भी स्मॉग छट गया और प्रदूषण में गिरावट होने की संभावना जताई गई है।

अराधना मौर्या

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