प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार..पंच दिवसीय ज्योति पर्व श्रृंखला छह दिन का होगा
पंच दिवसीय ज्योति पर्व श्रृंखला के बीच बन रहा अनूठा संयोग ................. सनातन धर्मावलंबियों के प्रमुख चार पर्वों में दीपावली का प्रमुख स्थान है । इस पंच दिवसीय ज्योति पर्व श्रृंखला में नौ पर्व त्योहार गूथें हुए हैं । इसका आरंभ कार्तिक कृष्ण त्रयोदशी पर धनतेरस से होकर समापन कार्तिक शुक्ल द्वितीया को यम द्वितीया से होगा ।
इस बार अमावस्या दो दिन पड़ने से पांच दिनी ज्योति पर्व श्रंखला छह दिन हो रही है । इस तरह प्रकाश ज्योति पर्व का 22 से 27 अक्टूबर तक चलेगा ।
वास्तव में अमावस्या तिथि की वृद्धि से इस बार कार्तिक कृष्ण पक्ष 16 दिनी है। इसमें प्रदोष और रात्रि व्यापिनी कार्तिक अमावस्या में 24 अक्टूबर को दीपावली तो दूसरे दिन 25 अक्टूबर को कार्तिक अमावस्या को खंडग्रास सूर्यग्रहण होगा । यह कुछ जगहों को छोड़कर पूरे भारत में दृश्य मान होगा । कार्तिक अमावस्या ग्रहण और भौमवती अमावस्या का संयोग विशेष होता है।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार कार्तिक अमावस्या में 25 अक्टूबर को ग्रतास्त सूर्य ग्रहण तुला राशि और स्वाति नक्षत्र पर लग रहा है । कार्तिक और भौमवती अमावस्या का संयोग इसे दुर्लभ बना रहा है । कार्तिक अमावस्या तिथि 24 अक्टूबर को शाम 5:04 पर लग रही है, जो अक्टूबर 25 को शाम 4:35 तक रहेगी ।
25 अक्टूबर को सूर्य ग्रहण भारत में सूर्यास्त के पूर्व आरंभ होगा । यह देश के अधिकांश भागों में दृश्य होगा । भारत के अतिरिक्त यूरोप, मध्य पूर्व उत्तरी अफ्रीका ,उत्तरी अटलांटिक महासागर, पश्चिमी एशिया ,उत्तर हिंद महासागर में भी दृश्य मान होगा । काशी में ग्रहण का स्पर्श शाम 4:42 बजे , मध्य 5:14 व मोक्ष 5:22 पर होगा ।
देश में अन्यत्र ग्रहण शाम लगभग 4:36 बजे से सूर्यास्त तक देखा जा सकेगा । यूनिवर्सल समय के अनुसार ग्रहण आरंभ दिन में 2:29 बजे , मध्य 4. 30 बजे , मोक्ष 6.32 बजे होगा ।