कार्तिक शुक्ल पष्ठी को सूर्यदेव की आराधना का लोक पर्व डाला छठ (सूर्य षष्ठी) मनाया जाता है। तिथि विशेष पर महिलाएं व्रत रख कर सायंकाल नदी, तालाब या जल पूरित स्थान में खड़े हो अस्ताचलगामी भगवान सूर्य को अर्घ्य देती हैं।
प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार ....दीप जला कर रात्रि जागरण के साथ गीत-कथा के जरिए भगवान सूर्य की महिमा का बखान किया जाता है। पर्व 30 अक्टूबर को मनाया जाएगा, लेकिन इसके विधान दो दिन पहले 28 अक्टूबर को ही नहाय खाय के साथ शुरू हो जाएंगे। समापन उदित सूर्य को अर्घ्य देकर 31 अक्टूबर को होगा।
(पंचमी में पष्ठी) 30 अक्टूबर को सुबह 8.15 बजे लग रही है जो 31 अक्टूबर को प्रातः 553 बजे तक रहेगी। वहीं 30 अक्टूबर को सूर्यास्त शाम 5.34 बजे होगा और 31 अक्टूबर को सूर्योदय सुबह 6.27.|
तिथि में नहा खाकर संयम भोजन से पर्व का आरंभ होगा। इसे नहाय खाय कहते हैं 29 को पंचमी तिथि में संझवत के दौरान एक समय शाम को मीठा भात (बखीर) या खिचड़ी खाई जाती है। 30 को पष्ठी पर व्रत का मुख्य दिन रहेगा। व्रती सायंकाल गंगा तट पर या किसी जल वाले स्थान पर अस्ताचल सूर्य को अर्घ्य देंगे। वहीं 31 को प्रातः काल अरुणोदय बेला में उगते सूर्य को अर्घ्य दिया जाएगा। तदुपरांत पारन होगा |