पूर्वजों के लिए समर्पित पितृपक्ष का आरंभ 11 सितम्बर से

Update: 2022-09-08 13:02 GMT

सनातन धर्म में अश्विन कृष्ण प्रतिपदा से अमावस्या तक के 15 दिन पूर्वजों के लिए समर्पित है। शास्त्रों में मनुष्यों के लिए देव ऋण, ऋषि ऋण , पितृ ऋण बताए गए हैं । कारण यह है कि जिन माता पिता ने हमारी आयु आरोग्यता सुख सौभाग्य आदि की वृद्धि के लिए अनेकानेक प्रयास किए उनके ऋण से मुक्त ना होने पर हमारा जन्म ग्रहण करना निरर्थक होता है इसीलिए हमारे पितरों के प्रति श्रद्धा समर्पित करने को पितृपक्ष महालया का प्राविधान किया गया है ।

इस बार पितृपक्ष 11 सितंबर से आरंभ हो रहा है और समापन 25 सितंबर को पितृ विसर्जन के साथ होगा । अश्विन कृष्ण प्रतिपदा तिथि 10 सितंबर को दोपहर 3:00 बज कर 46 मिनट पर लग रही है जो 11 सितंबर को दोपहर 2:15 तक रहेगी । इसीलिए पितृ पक्ष का पहला श्राद्ध 11 सितंबर को होगा वास्तव में महालया का आरंभ भाद्रपद शुक्ल पूर्णिमा इस बार 10 सितंबर से आरंभ होकर अश्विन अमावस्या तक होता है महालया का शाब्दिक अर्थ पितरों के आवाहन से पितरों के विसर्जन तक के 16 दिनों को कहा जाता है । 



काशी धर्म परिषद के महासचिव प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पंडित ऋषि द्विवेदी के अनुसार कुछ लोग अपने पुत्र आदि से श्राद्ध तर्पण की अपेक्षा करते हैं यदि उन्हें यह उपलब्ध नहीं होता है तो नाराज होकर श्राप देकर चले जाते हैं हर सनातनी को केवल वर्ष भर में उनकी मृत्यु तिथि को सर्व सुलभ जल, तिल यव, कुश और पुष्प आदि से श्राद्ध संपन्न करने और गो ग्रास आदि देकर एक तीन व पांच आदि ब्राह्मणों को भोजन करा देने से पितृ गण संतुष्ट होते हैं और उनके ऋणों से मुक्ति मिलती है ।

अतः इस सरलता से साध्य होने वाले कार्य की उपेक्षा नहीं करनी चाहिए। इसके लिए जिस मास की जिन तिथियों को माता-पिता आदि की मृत्यु हुई हो उस तिथि को श्राद्ध तर्पण गो ग्रास व ब्राह्मणों को भोजन कराना आवश्यक होता है इससे पितर प्रसन्न होते हैं और परिवार का सुख सौभाग्य एवं समृद्धि की अभिवृद्धि होती है ।

तिथियों की घटक बढ़त से मुक्त पखवारा........... इस बार पितृपक्ष 15 दिनों का पूर्ण होगा । तिथि की हानि वृद्धि नहीं है ।अश्विन अमावस्या तिथि 24-25 सितंबर की रात 2:54 पर लगेगी जो 26 सितंबर की भोर 3:24 तक रहेगी 26 सितंबर को ही प्रातः अश्विन शुक्ल प्रतिपदा तिथि मिलने से शारदीय नवरात्र का प्रारंभ माना जाएगा ।

 विशेष तिथियां............ मातृ नवमी 19 सितंबर तिथि विशेष पर माता की मृत्यु तिथि ज्ञात ना होने पर श्राद्ध का विधान है। अश्विन कृष्ण द्वादशी 22 सितंबर साधु गति वैष्णव का श्राद्ध आश्विन कृष्ण चतुर्दशी 24 सितंबर किसी दुर्घटना में मृत व्यक्तियों का श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या 25 सितंबर अज्ञात तिथि जिस मृतक की तिथि ज्ञात ना हो या अन्य अन्य कारणों से नियत तिथि पर श्राद्ध ना कर पाने के कारण तिथि विशेष पर श्राद्ध  रात में मुख्य द्वार पर दीपक जलाकर पितृ विसर्जन किया जाता है।

श्राद्ध दिन तारीख......

प्रतिपदा रविवार 11 सितंबर

द्वितीय सोमवार 12 सितंबर

तृतीय मंगलवार 13 सितंबर

चतुर्थी बुधवार 14 सितंबर

पंचमी बृहस्पतिवार 15 सितंबर

16 शुक्रवार 16 सितंबर

सप्तमी शनिवार 17 सितंबर

अष्टमी रविवार 18 सितंबर

नवमी सोमवार 19 सितंबर (मातृ नवमी )

दशमी मंगलवार 20 सितंबर एकादशी बुधवार 21 सितंबर (इंदिरा एकादशी व्रत)

द्वादशी बृहस्पतिवार 22 सितंबर (साधु यति वैष्णव श्राद्ध)

त्रयोदशी शुक्रवार 23 सितंबर चतुर्दशी शनिवार 24 सितंबर ( दुर्घटना आदि मृत्यु वालोंका श्राद्ध) सर्वपितृ अमावस्या 25 सितंबर (अज्ञात तिथि वालों या जो लोग नियत तिथि परश्राद्ध ना कर पाए हैं उनके लिए।)

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