प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार संतति कामना का व्रत लोलार्क षष्ठी 2 सितम्बर को। ....

Update: 2022-09-01 08:15 GMT


 



काशी धर्म परिषद के महासचिव प्रख्यात ज्योतिषाचार्य पं. ऋषि द्विवेदी के अनुसार सूर्यपष्ठी व्रत व लोलार्क षष्ठी व्रत दो सितम्बर को है जो की संतति की कामना से किया जाने  वाला व्रत है |   पष्ठी तिथि एक सितम्बर को दिन में 12:55 पर लगेगी जो दो सितम्बर को दिन में 11:26 मिनट तक रहेगी।

भाद्र शुक्ल पष्ठी को ही भगवान शिव के पुत्र कार्तिकेय भगवान के दर्शन का विधान है। इस दिन इनका दर्शन पूजन-वंदन करने से सभी तरह के कष्टों के साथ ही  ब्रम्ह हत्या जैसे पापो से मुक्ति मिलती है इस दिन व्रत के साथ लोलार्क कुंड में स्नान दान के उपरांत भगवान लोलार्केश्वर महादेव का दर्शन पूजन करने से निश्चित रूप से निःसंतानों को संतान सुख की प्राप्ति होती है। वास्तव में लोलार्क भगवान भाष्कर के द्वादश रूपों में प्रमुख रूप हैं।

लोलार्केश्वर महादेव की कथा महाभारत से जुडी है कहा जाता है की   काशी में भगवान आदित्य की तेजोमयी रश्मियां पहले लोलार्क कुंड में पड़ती हैं ऐसी लोक मान्यता है| 

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार देखा जाए तो जन्मांग में कालपुरुष की पांचवीं राशि सिंह है। इसके स्वामी ग्रह सूर्य है जो पंचम भाव का अर्थात संतान भाव का प्रतिनिधित्व करता है। इसीलिए संतति कामना के लिए हिन्दू धर्मशास्त्र में ग्रहराज सूर्य की महिमा का विस्तृत बखान किया गया है। संतान प्राप्ति के लिए जितने भी व्रत बताए गए हैं (ललही छठ, डाला छठ, लोलार्क षष्ठी व सूर्य षष्ठी) उन सभी में भगवान भाष्कर की पूजा होती है।

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