नहीं बनी जी20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में संयुक्त बयान जारी करने पर सहमति ,जाने आखहिर ऐसा क्यों?

Update: 2023-03-03 05:38 GMT



सर्दी अब जा चुकी है और गर्माहट महसूस होने लगी है। इधर, नई दिल्ली में कूटनीतिक गर्मी भी बढ़ गई है। जी20 के विदेश मंत्रियों की बृहस्पतिवार को हुई बैठक में यूक्रेन संघर्ष को लेकर पश्चिमी देशों और रूस के बीच तीखे मतभेदों के कारण संयुक्त वक्तव्य जारी नहीं किया जा सका, जबकि मेजबान देश भारत ने आम-सहमति बनाने के लिए सतत प्रयास किए। वहीं, इस संबंध में संयुक्त राष्ट्र में संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंतोनियो गुतारेस के प्रवक्ता ने कहा कि यह मेजबान के रूप में भारत के प्रयासों की कमी नहीं है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देशों के बीच बढ़ते ‘मतभेद' का नतीजा है।

भारत की अध्यक्षता में हुई बैठक में अध्यक्षता सारांश और परिणाम दस्तावेज स्वीकार किए गए, जिनमें समूह की कई अहम प्राथमिकताएं, जैसे.. भोजन/खाद्य पदार्थ, ऊर्जा और उर्वरक आदि सूचीबद्ध हैं।

जापानी विदेश मंत्री के भारत नहीं आने की ख़बर की पुष्टि नहीं हुई तभी 28 फ़रवरी को वॉशिंगटन स्थित हडसन इंस्टिट्यूट में एक जापानी रिसर्चर ने ट्वीट कर कहा था, ''अगर जापानी विदेश मंत्री हायाशी ने जी-20 के विदेश मंत्रियों की बैठक में नई दिल्ली जाने की योजना को रद्द किया तो यह भारत के लिए बहुत परेशान करने वाला होगा. इसका असर बाद में ज़रूर होगा।

जापानी विदेश मंत्री को भारत ज़रूर जाना चाहिए।'' द इंटरनेशनल इंस्टिट्यूट फ़ॉर स्ट्रैटिजिक स्टडीज़ में जापान की रिसर्चर युका सी कोशिनो ने लिखा है, ''जापान ने अपने विदेश मंत्री को भारत में आयोजित जी-20 देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में नहीं भेजने का फ़ैसला अगर औपचारिक रूप से किया है तो यह हैरान करने वाला है. भारत के सीनियर अधिकारी इस फ़ैसले को इसी रूप में देख रहे हैं. जापानी पीएम भारत को लेकर प्रतिबद्धता जताते रहे हैं जबकि यह रुख़ बिल्कुल उलट है।''

क्वॉड गुट में अमेरिका, जापान, ऑस्ट्रेलिया और भारत हैं. अभी तक स्पष्ट नहीं है कि जापानी विदेश मंत्रियों की ग़ैरमौजूदगी में क्वॉड के विदेश मंत्रियों की बैठक होगी या नहीं या फिर इसमें भी जापान के जूनियर मंत्री ही शामिल होंगे। भारत और जापान को क़रीबी सहयोगी के रूप में देखा जाता है लेकिन यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद से दोनों देशों के संबंधों में जटिलता आई है। जापान के प्रधानमंत्री फ़ुमिओ किशिदा ख़ुद यूक्रेन पर रूसी हमले को लेकर सख़्ती से पेश आ रहे हैं। रूस के ख़िलाफ़ पश्चिम के प्रतिबंध में जापान और दक्षिण कोरिया भी शामिल हैं। पिछले साल जब जापानी पीएम भारत के दौरे पर आए थे तब भी उन्होंने रूस की आलोचना की थी। जी-20 दुनिया की 20 बड़ी अर्थव्यवस्था वाले देशों का समूह है। 2023 में जी-20 की अध्यक्षता भारत के पास है. मोदी सरकार जी-20 की अध्यक्षता को बड़ी उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है। ऐसे में जापान के विदेश मंत्री के नहीं आने को झटके के तौर पर देखा जा रहा है।

कहा जाता है कि एशिया में चीन की बढ़ती आक्रामकता के कारण जापान भारत से रक्षा संबंध गहरा करना चाहता है। लेकिन भारत की रूस से दोस्ती को लेकर जापान असहज रहा है। पिछले साल सितंबर में भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंज़ो आबे की अंत्येष्टि में शामिल होने के लिए टोक्यो गए थे। दौरे में उन्होंने जापान के वर्तमान प्रधानमंत्री से भी मुलाक़ात की थी। इसी साल जनवरी में जापान और भारत के बीच पहली एयर ड्रिल्स हुई थी। इसके अलावा किशिदा सरकार ने जापान में मई महीने में होने वाले जी-7 समिट में भारत और ऑस्ट्रेलिया को भी आमंत्रित किया है।

ये दोनों देश जी-7 के सदस्य नहीं हैं लेकिन जापान ने अतिथि के तौर पर बुलाया है। जापान के सरकारी प्रसारक एनएचके के मुताबिक़ जी-7 में यूक्रेन संकट, परमाणु निरस्त्रीकरण और जलवायु परिवर्तन पर बात होनी है।

(प्रियांशु )

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