भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन ने मंगलवार को सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म एक्स पर NISAR मिशन से जुड़ा एक विशेष वीडियो साझा किया। इसमें उपग्रह के प्रक्षेपण से लेकर उसके GSLV-F16 रॉकेट से सफलतापूर्वक अलग होने तक की यात्रा को दिखाया गया है।
NISAR, नासा और इसरो का पहला संयुक्त उपग्रह है, जिसे पृथ्वी के पर्यावरण और सतह में होने वाले बदलावों पर नज़र रखने के उद्देश्य से विकसित किया गया है। इसका कुल वज़न 2,392 किलोग्राम है और इसे 743 किलोमीटर ऊंचाई पर सूर्य-समकालिक कक्षा में स्थापित किया गया है।
यह उपग्रह दोहरी आवृत्ति वाले सिंथेटिक अपर्चर रडार से लैस है, जिसमें नासा का एल-बैंड और इसरो का एस-बैंड शामिल है। यह पृथ्वी का अवलोकन करने वाला पहला उपग्रह है जो स्वीपएसएआर तकनीक का उपयोग करता है, जो 242 किलोमीटर के दायरे में विस्तृत और सटीक जानकारी देने में सक्षम है।
NISAR हर मौसम, दिन और रात में पृथ्वी का स्कैन कर सकेगा और हर 12 दिन में नया डेटा उपलब्ध कराएगा। यह ज़मीन के सूक्ष्म बदलावों, बर्फ की गति, वनस्पति में परिवर्तन, समुद्री बर्फ के वर्गीकरण, जहाजों की पहचान, तूफ़ानों की निगरानी और आपदा प्रबंधन में भी सहायक होगा।
NISAR परियोजना, इसरो और नासा के बीच एक दशक से अधिक समय से चले आ रहे मजबूत तकनीकी सहयोग का परिणाम है।