भाषा विश्वविद्यालय: सत्रारंभ पर कुलपति ने की समीक्षा बैठक, अकादमिक अनुशासन पर दिया जोर

Update: 2026-01-06 14:15 GMT


ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में सत्रारंभ के अवसर पर माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा की अध्यक्षता में विश्वविद्यालय के समस्त विषय-प्रभारियों, संकायाध्यक्षों एवं प्रभारी अधिकारियों की एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक के प्रारंभ में कुलपति महोदय ने सभी उपस्थित अधिकारियों एवं शिक्षकों को नववर्ष की शुभकामनाएँ दीं।

इस अवसर पर कुलपति महोदय ने विश्वविद्यालय द्वारा ऐतिहासिक रूप से निर्धारित समय से पूर्व सेमेस्टर परीक्षाओं के परिणाम घोषित किए जाने पर परीक्षा नियंत्रक, श्री विकास सहित सभी संबंधित अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों को बधाई देते हुए इसे विश्वविद्यालय की एक बड़ी उपलब्धि बताया।

कुलपति महोदय ने सभी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रदेश में ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय पहला ऐसा विश्वविद्यालय है, जिसने समय से पहले सेमेस्टर परीक्षा परिणाम घोषित कर एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह सफलता विश्वविद्यालय की शैक्षणिक प्रतिबद्धता, सुव्यवस्थित कार्यप्रणाली एवं सामूहिक प्रयासों का प्रतिफल है।

बैठक के दौरान कुलपति महोदय ने आगामी शैक्षणिक सत्र की गतिविधियों, नियमित कक्षाओं के सुचारु संचालन, विद्यार्थियों की उपस्थिति तथा अकादमिक अनुशासन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश प्रदान किए। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन की इस सत्र में भी प्राथमिकता रहेगी कि सभी शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्य समयबद्ध, पारदर्शी एवं प्रभावी ढंग से संपन्न हों।

कुलपति महोदय ने राज्यपाल भवन से प्राप्त निर्देशों के अनुरूप एवं माननीय कुलाधिपति महोदया एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल के दिशानिर्देशों में विद्यार्थियों की न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति सुनिश्चित करने पर विशेष बल देते हुए सभी विभागों को वर्तमान सत्र में इसका कड़ाई से अनुपालन कराने के निर्देश दिए।

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के समस्त संकायों के संकायाध्यक्ष, विभागाध्यक्ष एवं विषय-प्रभारी उपस्थित रहे। बैठक में विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. महेश कुमार तथा अधिष्ठाता (शैक्षणिक) प्रो. सौबान सईद, प्रो. मसूद आलम, डॉ अताउर रहमान की भी गरिमामयी उपस्थिति रही।

बैठक के प्रमुख बिंदु

* समयबद्ध परीक्षा संचालन एवं परिणाम घोषणा को विश्वविद्यालय की प्राथमिक उपलब्धि बताया गया।

* आगामी शैक्षणिक सत्र की रूपरेखा एवं कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई।

* सभी विभागों को नियमित कक्षाओं का सख्ती से संचालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए।

* विद्यार्थियों की न्यूनतम 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य रूप से लागू करने पर विशेष जोर।

* अकादमिक अनुशासन बनाए रखने हेतु विभागाध्यक्षों को सतत निगरानी के निर्देश।

* शैक्षणिक एवं प्रशासनिक कार्यों को समयबद्ध, पारदर्शी और प्रभावी ढंग से संपन्न करने पर बल।

* विश्वविद्यालय की अकादमिक साख को और सुदृढ़ करने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर।

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