महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय में विद्यार्थियों की रचनात्मकता का उत्सव, कुलपति ने सराही प्रतिभा

Update: 2026-02-25 13:08 GMT


आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय के परिसर स्थित ललित कला संकाय में सोमवार को रचनात्मकता और कला कौशल का जीवंत दृश्य देखने को मिला। एप्लाइड आर्ट्स, पेंटिंग एवं स्कल्प्चर विभाग के बीएफए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों द्वारा आयोजित कार्य-प्रदर्शनी (वर्क डिस्प्ले) ने न केवल कला प्रेमियों को आकर्षित किया, बल्कि विश्वविद्यालय प्रशासन का भी ध्यान खींचा।

प्रदर्शनी का अवलोकन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने किया। विद्यार्थियों की कलात्मक दक्षता, कल्पनाशीलता और विषय प्रस्तुति से वे विशेष रूप से प्रभावित दिखे। उन्होंने प्रदर्शनी की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के आयोजन छात्रों को अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का सशक्त मंच प्रदान करते हैं तथा उनके आत्मविश्वास को नई ऊँचाइयों तक ले जाते हैं।

प्रदर्शनी में चित्रकला, शिल्पकला और अनुप्रयुक्त कला की विविध विधाओं में तैयार की गई कलाकृतियाँ प्रदर्शित की गईं। रंगों के सजीव संयोजन, रचनाओं की मौलिकता और विचारों की गहराई ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

मीडिया प्रभारी के अनुसार बीएफए प्रथम वर्ष के विद्यार्थियों— विकास मद्धेशिया, अरुण कुमार विश्वकर्मा, आशुतोष सिंह, आकर्ष गोंड, अंशिका सिंह, प्रीति यादव, श्वेता प्रजापति, सपना कुमारी एवं खुशी यादव — ने अपनी सृजनात्मक प्रतिभा का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। प्रत्येक कृति में विद्यार्थियों की मेहनत, अभ्यास और कलात्मक दृष्टि स्पष्ट रूप से परिलक्षित हुई।

कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि एप्लाइड आर्ट्स, पेंटिंग एवं स्कल्प्चर विभाग के विद्यार्थियों द्वारा प्रस्तुत यह प्रदर्शनी विश्वविद्यालय की शैक्षणिक गुणवत्ता और सृजनात्मक वातावरण का प्रतीक है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे आयोजनों से विद्यार्थियों को व्यावहारिक अनुभव प्राप्त होता है और उनकी प्रतिभा को व्यापक पहचान मिलती है।

इस अवसर पर विभाग के प्राध्यापकगण, गैर-शिक्षण कर्मचारी, छात्र-छात्राएँ तथा सत्यम त्रिपाठी, गुलशन सोनकर, डॉ. अजीत कुमार पटेल, भूपेंद्र पांडे एवं विपिन शर्मा सहित अनेक गणमान्य उपस्थित रहे। सभी ने विद्यार्थियों के परिश्रम, समर्पण और कला साधना की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।

प्रदर्शनी ने यह सिद्ध कर दिया कि विश्वविद्यालय परिसर में प्रतिभा की कमी नहीं है, आवश्यकता है तो केवल ऐसे मंचों की, जो नवोदित कलाकारों को अपनी रचनात्मक उड़ान भरने का अवसर प्रदान करें।

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