वि०वि० विज्ञान वर्ग के शोधार्थियों से सीधे रूबरू हुए कुलपति

Update: 2026-02-25 14:46 GMT


आजमगढ़। शहर के प्रतिष्ठित महाविद्यालय Shibli National College परिसर में आज विश्वविद्यालय के कुलपति Prof. Sanjeev Kumar ने विज्ञान वर्ग के शोधार्थियों के कोर्सवर्क पठन-पाठन का स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने शोधार्थियों से सीधे संवाद कर उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा शैक्षणिक वातावरण का अवलोकन किया।

कुलपति के अचानक आगमन से शोधार्थी उत्साहित एवं आश्चर्यचकित दिखे। उन्होंने स्पष्ट संकेत दिए कि विज्ञान वर्ग के शोधार्थियों की कोर्सवर्क परीक्षा मई माह में कराई जा सकती है, जिससे शोध कार्य की गति को व्यवस्थित किया जा सके।

डिजिटल संसाधनों पर जोर

संवाद के दौरान कुलपति ने कहा कि वर्तमान समय में शोध के क्षेत्र में जानकारी प्राप्त करना पहले की अपेक्षा सरल हुआ है। कंप्यूटर, मोबाइल और एआई जैसे तकनीकी माध्यमों से शोध संबंधी जिज्ञासाओं का समाधान त्वरित संभव है। उन्होंने शोधार्थियों को विश्वविद्यालय पुस्तकालय के क्यूआर कोड से जुड़ने की सलाह देते हुए कहा कि डिजिटल संसाधनों का अधिकतम उपयोग कर अध्ययन को सुदृढ़ बनाया जा सकता है।

रसायन विज्ञान की शोधार्थी प्रतिमा गुप्ता ने कंप्यूटरयुक्त पुस्तकालय कीआवश्यकता पर बल दिया। इस पर कुलपति ने आश्वस्त किया कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर उपयोग से अनेक समस्याओं का समाधान संभव हैl

गणित के शोधार्थी सूरज यादव ने दूरस्थ जनपद जौनपुर से आने की कठिनाइयों का उल्लेख किया, जिस पर कुलपति ने शोध काल में धैर्य और अनुशासन की आवश्यकता पर बल दिया।

भौतिकी की शोधार्थी सौम्या प्रजापति ने विषयगत जटिलताओं की ओर ध्यान आकर्षित किया। इस पर कुलपति ने शोध निदेशकों को निर्देशित किया कि आधारभूत अवधारणाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

वनस्पति विज्ञान की शोधार्थी श्रेया यादव द्वारा उपस्थिति में आंशिक रियायत की मांग पर कुलपति ने स्पष्ट किया कि 75 प्रतिशत उपस्थिति अनिवार्य है, विशेष परिस्थितियों में अधिकतम 5 प्रतिशत की छूट दी जा सकती है।

कुलपति ने शोधार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे भविष्य के प्राध्यापक हैं और समाज उनसे उच्च अपेक्षाएँ रखता है। उन्होंने सतही अध्ययन से बचते हुए विषय की गहराई में जाकर अध्ययन करने की प्रेरणा दी।

मोबाइल के सदुपयोग पर बल देते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक ज्ञान का साधन है, किंतु गुरु-शिष्य परंपरा का स्थान कोई नहीं ले सकता। शोधपत्र प्रकाशन की प्रक्रिया में आने वाली चुनौतियों का सकारात्मक दृष्टिकोण से सामना करने की भी उन्होंने सलाह दी।

गरिमामय उपस्थिति

कार्यक्रम में महाविद्यालय के प्राचार्य प्रो. अफसर अली, वरिष्ठ प्रो. खालिद, विज्ञान वर्ग के समन्वयक सैयद ताहिर हुसैन, डॉ. अहमद, डॉ. कौशिक, डॉ. सादिक खान, डॉ. सिराज अहमद खान, प्रो. प्रकाश चंद सहित अनेक प्राध्यापक एवं शोधार्थी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम का समापन संवादात्मक एवं प्रेरणादायी वातावरण में हुआ, जहाँ शोधार्थियों ने कुलपति के सीधे संवाद को उत्साहवर्धक बताया।

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