प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज बैंकॉक में बिम्‍स्‍टेक के छठे शिखर सम्‍मेलन में भाग लेंगे

Update: 2025-04-04 04:53 GMT



प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज थाईलैंड के बैंकॉक में बहु क्षेत्रीय तकनीकी और आर्थिक सहयोग के लिये बंगाल की खाड़ी स्थित देशों की पहल -बिम्‍स्‍टेक के छठे शिखर सम्‍मेलन में भाग लेंगे। सम्‍मेलन की थीम है-बिम्‍स्‍टेक-समृद्ध, समायोजी और समावेशी। सम्‍मेलन के दौरान बैंकॉक दृष्टि पत्र 2030 अनुमोदित किया जाएगा और भावी रणनीति तय करने के लिए बिम्‍स्‍टेक गणमान्य व्यक्ति समूह की रिपोर्ट का भी अनुमोदन होगा।


प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी दो दिन की थाईलैंड यात्रा पर कल बैंकॉक पहुंचे। उन्‍होंने थाईलैंड के प्रधानमंत्री पेथोनथान शिनोवात्रा के साथ द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने परस्पर सहयोग के विभिन्‍न मुद्दों की समीक्षा की। राजनीतिक, रक्षा और सुरक्षा भागीदारी, रणनीतिक संबंध, व्‍यापार और निवेश तथा लोगों के बीच संपर्क बढ़ाने के उपायों पर विचार-विमर्श हुआ। स्‍वास्‍थ्‍य, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, नवाचार, डिजिटल प्रौद्योगिकी, शिक्षा, संस्‍कृति और पर्यटन क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर बल दिया गया। दोनों नेताओं ने मानव तस्‍करी, मादक पदार्थों की तस्‍करी और साइबर घोटालों सहित संगठित अपराधों से निपटने के लिए सहयोग बढ़ाने पर भी विचार किया। इसके अलावा वैश्विक मुद्दों पर भी चर्चा हुई तथा बिम्‍स्‍टेक, आसियान और मेकॉग गंगा सहयोग सहित क्षेत्रीय और बहुपक्षीय मंचों पर संपर्क बढ़ाने के उपायों पर भी विचार-विमर्श हुआ।



श्री मोदी और श्री शिनोवात्रा की उपस्थिति में भारत-थाईलैंड कार्यनीतिक भागीदारी से संबंधित संयुक्‍त घोषणा पत्र का आदान-प्रदान हुआ। हथकरघा और हस्‍तशिल्‍प, डिजिटल प्रौद्योगिकी, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम और समुद्री सहयोग क्षेत्रों में समझौतों पर हस्‍ताक्षर हुए। दोनों नेताओं ने भारत-थाईलैंड दूतावास संवाद की शुरूआत का स्‍वागत किया। इससे दोनों देशों के लोगों के बीच संपर्क सुविधा बढे़गी।

बिम्‍स्‍टेक शिखर सम्‍मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी आज अपनी यात्रा के दूसरे चरण में श्रीलंका जाएंगे। श्रीलंका की तीन दिन की यात्रा के दौरान वे राष्‍ट्रपति अनुरा कुमारा दिसानायके के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। श्री दिसानायके राष्‍ट्रपति पद संभालने के बाद अपनी पहली विदेश यात्रा में भारत आये थे। प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी की यह श्रीलंका की चौथी यात्रा होगी। दोनों देशों के बीच गहरे ऐतिहासिक और सांस्‍कृतिक संबंध रहे हैं, जो समय के साथ और मजबूत हुए हैं। भारत की पड़ोसी प्रथम नीति के तहत श्रीलंका का महत्‍वपूर्ण स्‍थान है।

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