ऋषिकेश के सुनियोजित विकास के लिए महायोजना-2031 को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है। सचिवालय में आयोजित बैठक में इस योजना से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर मंथन किया गया। बैठक की अध्यक्षता सचिव आवास डॉ. आर राजेश कुमार ने की, जिसमें टिहरी, पौड़ी और देहरादून के अधिकारियों ने भाग लिया।
बैठक में तपोवन क्षेत्र की चुनौतियों पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने बताया कि पिछले वर्षों में यहां अनियोजित और अवैध निर्माण तेजी से बढ़े हैं, जिससे यातायात, पार्किंग और सीवरेज जैसी सुविधाओं पर दबाव बढ़ा है और स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों को भी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
महायोजना-2031 में इन समस्याओं के समाधान के लिए प्रावधान किए गए हैं। जिन क्षेत्रों में पहले से होटल और व्यावसायिक गतिविधियां विकसित हो चुकी हैं, उन्हें पर्यटन उपयोग क्षेत्र के रूप में चिन्हित किया गया है। साथ ही भविष्य में अनियोजित निर्माण पर रोक लगाने के लिए सख्त नियम भी शामिल किए गए हैं।
अधिकारियों ने बताया कि महायोजना को संबंधित प्राधिकरणों से स्वीकृति मिलने के बाद जनसुनवाई और सुझावों के आधार पर संशोधित किया गया है और अब यह अंतिम चरण में है। तीनों जिलों से प्राप्त सुझावों को 15 दिनों के भीतर समेकित कर शासन को भेजा जाएगा, ताकि योजना को जल्द लागू किया जा सके।
सरकार का मानना है कि इस योजना के लागू होने से ऋषिकेश में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।