एआई एवं साइबर सुरक्षा पर 75 घंटे का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम होगा शुरू-- प्रो. संजीव कुमार

Update: 2026-05-08 13:54 GMT


आजमगढ़।उच्च शिक्षा के क्षेत्र में तकनीकी नवाचार, आधुनिक ज्ञान-विज्ञान और कौशल आधारित शिक्षा को बढ़ावा देने की दिशा में महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय,आजमगढ़ ने एक महत्वपूर्ण एवं दूरदर्शी पहल करते हुए आईआईटी ,कानपुर के साथ समझौता ज्ञापन (एमओयू) कर कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) एवं साइबर सुरक्षा विषयक 75 घंटे का विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ करने की घोषणा की है। यह विशेष कार्यक्रम विद्यार्थियों, शोधार्थियों और शिक्षकों को अत्याधुनिक तकनीकी ज्ञान से जोड़ने के साथ-साथ उन्हें डिजिटल युग की चुनौतियों, संभावनाओं और नवाचारों के प्रति जागरूक करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।यह कार्यक्रम नई शिक्षा नीति-2020 के तहत शुरू होगा |

इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि, महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय,आजमगढ़ विद्यार्थियों को वैश्विक प्रतिस्पर्धा के अनुरूप तैयार करने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। आईआईटी ,कानपुर जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ यह शैक्षणिक साझेदारी विश्वविद्यालय के लिए नई दिशा, नई ऊर्जा और नई संभावनाओं का द्वार खोलेगी। एआई और साइबर सुरक्षा जैसे अत्याधुनिक विषयों पर यह विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम विद्यार्थियों के ज्ञान, कौशल और व्यक्तित्व विकास में मील का पत्थर सिद्ध होगा। हमारा लक्ष्य है कि विश्वविद्यालय का प्रत्येक विद्यार्थी तकनीकी रूप से सक्षम, नवाचारी और आत्मविश्वासी बनकर वैश्विक मंच पर अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित करे।”

इसी क्रम में विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित एक विशेष व्याख्यान कार्यक्रम में आईआईटी के प्रख्यात विशेषज्ञ प्रो. सृजन पाल सिंह, नेहा श्रीवास्तव एवं गूंजा ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता और साइबर सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर विस्तारपूर्वक प्रकाश डाला। कार्यक्रम में उपस्थित विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं अकादमिक समुदाय ने विशेषज्ञों के विचारों को गंभीरता से सुना और इसे तकनीकी भविष्य की दिशा में विश्वविद्यालय की एक उल्लेखनीय पहल बताया।

अपने प्रभावशाली प्रेजेंटेशन के दौरान प्रो. सृजन पाल सिंह ने कहा कि, “कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल एक तकनीकी अवधारणा नहीं, बल्कि आने वाले समय की सबसे प्रभावशाली परिवर्तनकारी शक्ति है। शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, प्रशासन, उद्योग, मीडिया और शोध जैसे सभी क्षेत्रों में एआई नई संभावनाओं के द्वार खोल रहा है। यदि भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में आगे बढ़ना है, तो युवाओं को एआई की गहरी समझ, उसके व्यावहारिक उपयोग और नवाचार की संस्कृति से जोड़ना अनिवार्य होगा। भविष्य उन्हीं का होगा, जो तकनीक का केवल उपयोग नहीं करेंगे, बल्कि उसे नई दिशा देने का सामर्थ्य भी रखेंगे।”उन्होंने यह भी कहा कि अब विश्वविद्यालयों को पारंपरिक शिक्षा पद्धति से आगे बढ़ते हुए कौशल आधारित, अनुसंधानपरक और तकनीक-केंद्रित शिक्षा व्यवस्था को अपनाना होगा, जिससे विद्यार्थी केवल रोजगार पाने वाले नहीं, बल्कि नए अवसरों और रोजगार के सृजनकर्ता बन सकें।

इसके पश्चात नेहा श्रीवास्तव ने साइबर सुरक्षा जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण एवं संवेदनशील विषय पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि, “डिजिटल क्रांति जितनी तीव्र गति से आगे बढ़ रही है, साइबर अपराधों का स्वरूप भी उतनी ही तेजी से जटिल और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। आज केवल तकनीकी ज्ञान पर्याप्त नहीं है, बल्कि डिजिटल सतर्कता, डेटा सुरक्षा और साइबर नैतिकता की समझ भी उतनी ही आवश्यक है। व्यक्तिगत सूचनाओं की सुरक्षा, सुरक्षित ऑनलाइन व्यवहार और साइबर हमलों से बचाव के लिए युवाओं को प्रशिक्षित करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता बन गया है।”उन्होंने विद्यार्थियों को साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में उपलब्ध व्यापक करियर संभावनाओं की जानकारी देते हुए इस क्षेत्र में विशेषज्ञता विकसित करने के लिए प्रेरित किया।

कार्यक्रम में गूंजा ने भी दोनों विशेषज्ञों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए प्रस्तुति को प्रभावी एवं संवादात्मक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने तकनीकी विषयों को सरल, सहज और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से प्रस्तुत कर विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया तथा एआई एवं साइबर सुरक्षा के प्रति युवाओं में नई सोच और उत्साह का संचार किया।

कार्यक्रम के अंत में उपस्थित शिक्षकों एवं विद्यार्थियों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक, दूरदर्शी और परिवर्तनकारी कदम बताया। इस अवसर पर विश्वविद्यालय के अनेक शिक्षकगण, अधिकारी, शोधार्थी एवं छात्र-छात्राएं बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। संपूर्ण आयोजन का वातावरण ज्ञान, नवाचार, तकनीकी जागरूकता और भविष्य के निर्माण के संकल्प से ओत-प्रोत रहा।

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