25वीं अकादमिक परिषद की बैठक में नए पाठ्यक्रमों, पीएचडी कार्यक्रमों और शोध प्रोत्साहन नीतियों को मिली मंजूरी

Update: 2026-02-04 12:28 GMT



ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ की 25वीं अकादमिक परिषद की बैठक विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने की। बैठक के प्रारंभ में कुलसचिव डॉ. महेश कुमार द्वारा अकादमिक परिषद के सभी सदस्यों का स्वागत कर किया गया ।

बैठक में विश्वविद्यालय के शैक्षणिक विस्तार, शोध संवर्धन और नवाचार को बढ़ावा देने से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर विचार-विमर्श कर निर्णय लिए गए। अकादमिक परिषद ने ललित कला संकाय के अंतर्गत बीए संगीत (वोकल) पाठ्यक्रम प्रारंभ करने को स्वीकृति दी। इसके साथ ही विधि अध्ययन संकाय तथा फार्मेसी और जैव प्रौद्योगिकी अभियांत्रिकी विभाग में पीएचडी कार्यक्रम शुरू करने का निर्णय लिया गया, जिससे विश्वविद्यालय में शोध गतिविधियों को सुदृढ़ आधार मिलेगा।

एआई शिक्षा को बढ़ावा देने की पहल

अकादमिक परिषद ने सभी विभागों के लिए 30 घंटे का “एआई फॉर एवरीवन” प्रमाणपत्र कार्यक्रम शुरू करने को मंजूरी दी। यह पाठ्यक्रम विश्वविद्यालय के सभी स्नातक, स्नातकोत्तर एवं पीएचडी विद्यार्थियों के लिए वैल्यू ऐडेड कोर्स के रूप में संचालित किया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य छात्रों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की आधारभूत समझ प्रदान कर उन्हें भविष्य की तकनीकी आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार करना है।

शोध को प्रोत्साहित करने और एक सुदृढ़ शोध इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से सेमिनार नीति को भी अनुमोदन प्रदान किया गया। इस नीति के अंतर्गत विश्वविद्यालय स्तर पर सेमिनार के लिए 20,000 रुपये, राष्ट्रीय सेमिनार के लिए 1 लाख रुपये तथा अंतरराष्ट्रीय सेमिनार के लिए 2 लाख रुपये की वित्तीय सहायता दी जाएगी। साथ ही सेमिनार और सम्मेलनों के आयोजन हेतु यात्रा भत्ता, प्री-कॉन्फ्रेंस प्रकाशन शुल्क तथा स्थानीय आतिथ्य (बोर्डिंग एवं लॉजिंग) की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। साथ ही परिषद द्वारा इस पर भी सहमति बनी की संकाय सदस्यों को राष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए प्रत्येक छह माह में तथा अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए तीन वर्ष में एक बार ग्रांट प्रदान की जाएगी।

अकादमिक परिषद ने फार्मेसी संकाय के बी.फार्मा चतुर्थ वर्ष के पाठ्यक्रम को फार्मेसी काउंसिल ऑफ इंडिया के मानकों के अनुरूप अनुमोदित किया। इसके अतिरिक्त बीपीईएस (बैचलर ऑफ़ फिजिकल एजुकेशन एवं स्पोर्ट्स) एवं बीपीईडी पाठ्यक्रमों के लिए पोर्टल खुलने के पश्चात प्रवेश प्रक्रिया प्रारंभ करने का निर्णय लिया गया।

बैठक में एमएससी जूलॉजी, एमएससी बायोटेक्नोलॉजी, एमएससी माइक्रोबायोलॉजी, एमए समाजशास्त्र, एमए संस्कृत, बीए मनोविज्ञान तथा एमटेक स्ट्रक्चरल इंजीनियरिंग (एआईसीटीई मानकों के अनुरूप) को भी स्वीकृति प्रदान की गई। साथ ही बीटेक साइबर सिक्योरिटी पाठ्यक्रम को मंजूरी दी गई, जिसमें विशेषीकृत विषयों का अध्यापन उद्योग विशेषज्ञों द्वारा कराया जाएगा। एमटेक बायोटेक्नोलॉजी को एआई इंटीग्रेटेड डिग्री के रूप में संचालित किए जाने का भी निर्णय लिया गया।

परामर्श नीति को अद्यतन करते हुए यह निर्णय लिया गया कि कंसल्टेंसी से प्राप्त आय का 95 प्रतिशत हिस्सा संकाय सदस्य तथा 5 प्रतिशत हिस्सा विश्वविद्यालय को प्रदान किया जाएगा। अवधी शोध पीठ के अंतर्गत बीए इन अवधी कार्यक्रम एवं अवधी भाषा में प्रमाणपत्र पाठ्यक्रम शुरू करने, साथ ही बीएससी एवं एमएससी होम साइंस पाठ्यक्रमों को पुनः प्रारंभ करने को भी स्वीकृति दी गई।

बैठक में अकादमिक परिषद के सदस्य प्रो. आद्या प्रसाद पांडेय एवं प्रो. एस. पी. शुक्ला ने ऑनलाइन माध्यम से सहभागिता की, जबकि प्रो. बलराज चौहान, वित्त अधिकारी संजीव गुप्ता, प्रो. चंदना डे, प्रो. सैयद हैदर अली, प्रो. मसूद आलम एवं डॉ. तहरीर फातिमा सहित अन्य सदस्य भी बैठक में उपस्थित रहे।

बैठक की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि अकादमिक परिषद द्वारा लिए गए ये निर्णय विश्वविद्यालय को बहुविषयक, शोध-केंद्रित और तकनीक-सक्षम शैक्षणिक संस्थान के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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