छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय में भारतीय भाषाओं व कृत्रिम बुद्धिमत्ता पर मंथन*

Update: 2026-01-20 12:50 GMT


कानपुर के *भाषा संकाय* एवं *भारतीय भाषा समिति, नई दिल्ली* के संयुक्त तत्वावधान में 30 एवं 31 जनवरी 2026 को “*भारतीय भाषा परिवार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता: 21वीं सदी की चुनौतियाँ और संभावनाएँ” विषय पर एक **दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी* का आयोजन किया जा रहा है। यह संगोष्ठी *सेनानायक तात्या टोपे सभागार* एवं भाषा संकाय परिसर में ऑनलाइन एवं ऑफलाइन (हाइब्रिड मोड) में संपन्न होगी।

*सीएसजेएमयू में 30–31 जनवरी को भारतीय भाषाओं व एआई को लेकर होगा गहन मंथन*

तेजी से विकसित हो रही कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) के युग में भारतीय भाषाओं की भूमिका, संभावनाओं और चुनौतियों पर इस राष्ट्रीय संगोष्ठी में गंभीर अकादमिक विमर्श किया जाएगा। संगोष्ठी का उद्देश्य भारतीय भाषाओं को तकनीकी रूप से सक्षम बनाते हुए शिक्षा, अनुसंधान, अनुवाद, लोक साहित्य और डिजिटल नवाचार के क्षेत्रों में उनके उपयोग और विस्तार पर ठोस संवाद स्थापित करना है।

*भाषा संकाय द्वारा आयोजित राष्ट्रीय स्तर का अकादमिक आयोजन*

विश्वविद्यालय के भाषा संकाय की ओर से आयोजित इस संगोष्ठी में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों, शोध संस्थानों एवं अकादमिक मंचों से जुड़े भाषाविद, शिक्षक, शोधार्थी और नीति-विशेषज्ञ सहभागिता करेंगे। कार्यक्रम में भारतीय भाषाओं की अंतर्निहित एकता, मातृभाषा में शिक्षा की आवश्यकता, औपनिवेशिक भाषा-वर्गीकरण से मुक्ति तथा भारतीय भाषाओं की वैश्विक पहचान जैसे विषयों पर विचार-विमर्श होगा।

*200 से अधिक शोध-पत्रों पर सत्रों में होगा विचार-विमर्श*

इस दो दिवसीय संगोष्ठी में *200 से अधिक शोध-पत्रों* पर तकनीकी सत्रों, पैनल चर्चाओं एवं संवादात्मक प्रस्तुतियों के माध्यम से मंथन किया जाएगा। चयनित शोध-पत्रों को *ISBN सहित पुस्तकाकार रूप में प्रकाशित* किया जाएगा, जिससे भारतीय भाषा अध्ययन एवं कृत्रिम बुद्धिमत्ता से जुड़े शोध को नया वैचारिक आयाम प्राप्त होगा।

*समन्वयक डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी ने क्या कहा*

संगोष्ठी के समन्वयक एवं स्कूल ऑफ लैंग्वेजेज के निदेशक *डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी* ने कहा कि “यह संगोष्ठी भारतीय भाषाओं को केवल अध्ययन का विषय नहीं, बल्कि तकनीकी और बौद्धिक भविष्य की आधारशिला के रूप में देखने का प्रयास है। कृत्रिम बुद्धिमत्ता के साथ भारतीय भाषाओं का समन्वय 21वीं सदी की सबसे बड़ी शैक्षणिक आवश्यकता है।”

*संयोजक डॉ. श्रीप्रकाश का विचार*

कार्यक्रम के संयोजक एवं हिन्दी विभाग के प्रभारी *डॉ. श्रीप्रकाश* ने कहा कि “यह राष्ट्रीय संगोष्ठी भारतीय भाषाओं के सशक्तिकरण की दिशा में एक सार्थक पहल है। हमारा उद्देश्य यह स्पष्ट करना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता केवल तकनीक नहीं, बल्कि भारतीय भाषाओं, संस्कृति और मानवीय मूल्यों को वैश्विक मंच तक पहुँचाने का सशक्त माध्यम बन सकती है।”

यह संगोष्ठी भारतीय भाषाओं और आधुनिक तकनीक के समन्वय से जुड़े राष्ट्रीय विमर्श को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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