भाषा विवि में हुआ माइक्रोबियल टेक्निक एन्ड इंस्ट्रूमेंशन वर्कशॉप का भव्य उद्घाटन
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय (केएमसीएलयू), लखनऊ के एटल हॉल, एफओईटी में आज “हैंड्स-ऑन वर्कशॉप: माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी तकनीकें एवं उपकरण” विषयक 6-दिवसीय राष्ट्रीय वर्कशॉप सह एफडीपी/एमडीपी का उद्घाटन सत्र सफलतापूर्वक संपन्न हुआ। यह वर्कशॉप केएमसीएलयू के बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग विभाग द्वारा बायोवर्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के सहयोग से सीएसआईआर-नेशनल बॉटनिकल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनबीआरआई), लखनऊ के आदरणीय संरक्षण में आयोजित किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ प्रतिष्ठित विद्वानों, वैज्ञानिकों, उद्योग विशेषज्ञों, संकाय सदस्यों एवं उत्साही प्रतिभागियों की उपस्थिति में हुआ। यह वर्कशॉप माइक्रोबियल बायोटेक्नोलॉजी एवं आधुनिक प्रयोगशाला उपकरणों में गहन प्रायोगिक अभ्यास एवं तकनीकी विशेषज्ञता प्रदान करने का उद्देश्य रखता है।
भारतीय माइक्रोबायोलॉजिस्ट सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. ए. एम. देशमुख ने अपने संबोधन में सभी वैज्ञानिक अनुशासनों में जीवविज्ञान की महत्वपूर्णता पर प्रकाश डालते हुए बताया कि बायोफिजिक्स, बायोटेक्नोलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी एवं अन्य जीवन विज्ञान गहराई से परस्पर जुड़े हुए हैं। उन्होंने विद्यार्थियों एवं शोधकर्ताओं को अन्तरविषयक वैज्ञानिक समझ विकसित करने का आह्वान किया।
पूर्व सीआईयू अध्यक्ष एवं पूर्व कुलपति प्रो. डी. एस. चौहान ने विचारोत्तेजक संदेश देते हुए कहा कि सच्ची शिक्षा के लिए ज्ञान की गहराई एवं उद्देश्य की स्पष्टता आवश्यक है। उन्होंने जोर दिया कि ज्ञान के उद्देश्य एवं कार्यक्षेत्र को न समझे जाने पर शिक्षा एवं शोध का वास्तविक महत्व समझना कठिन होता है। उनका संबोधन प्रतिभागियों को केंद्रित एवं शैक्षणिक जिम्मेदारी के साथ ज्ञान अर्जन करने के लिए प्रेरित करने वाला रहा। युक्ति के सह-संस्थापक एवं रणनीति प्रमुख श्री अखिलेश शुक्ल ने उद्यमिता एवं नवाचार पर बल देते हुए विद्यार्थियों को स्टार्ट-अप्स, उद्योग सहयोग एवं बायोटेक्नोलॉजी आधारित उद्यमों की खोज करने के लिए प्रोत्साहित किया।
केएमसीएलयू के एफओईटी निदेशक प्रो. आर. के. त्रिपाठी ने स्वास्थ्य, पर्यावरण एवं कृषि से जुड़ी वैश्विक चुनौतियों के समाधान में बायोटेक्नोलॉजी की महत्वपूर्णता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रायोगिक वर्कशॉप सैद्धांतिक शिक्षा एवं व्यावहारिक उद्योग आवश्यकताओं के बीच की खाई को पाटते हैं।
माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय तनेजा ने उच्च शिक्षा में प्रायोगिक शिक्षा के महत्व पर बल देते हुए कहा कि पुस्तकों से परे वास्तविक अभ्यास प्रदान करने वाले ऐसे वर्कशॉप विद्यार्थियों की तकनीकी क्षमता एवं पेशेवर आत्मविश्वास को आकार देते हैं। उन्होंने सभी विशिष्ट अतिथियों एवं वक्ताओं के मूल्यवान विचारों एवं सौजन्यपूर्ण शब्दों के लिए आभार व्यक्त किया।
बायोटेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग विभाग की संयोजिका एवं विभागाध्यक्ष डॉ. ममता शुक्ल ने कहा कि माइक्रोबियल तकनीकों एवं प्रयोगशाला उपकरणों का प्रायोगिक अभ्यास विद्यार्थियों की शोध क्षमता एवं रोजगार योग्यता को मजबूत करेगा।
वर्कशॉप के तकनीकी सत्र बायोवर्स टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड, लखनऊ के शोध वैज्ञानिक डॉ. आकाश सिंह एवं शोध सहायक इं. पुनीत चतुर्वेदी के विशेषज्ञ मार्गदर्शन में संपन्न होंगे, जो प्रायोगिक प्रशिक्षण एवं उद्योग-उन्मुख जानकारी प्रदान करेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. ममता शुक्ल ने धन्यवाद ज्ञापन देते हुए विशिष्ट अतिथियों, वक्ताओं, आयोजन सदस्यों एवं प्रतिभागियों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया।उद्घाटन समारोह के दौरान डॉ. मनवेंद्र सिंह, सहायक प्रोफेसर, इं. राशि श्रीवास्तव, सहायक प्रोफेसर, इं. धीरेंद्र सिंह, सहायक प्रोफेसर, डॉ. इफ्फत आज़िम, सहायक प्रोफेसर और शिवांशी त्रिपाठी सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी भारी संख्या में उपस्थित रहे.