भाषा विवि में अवध के अरबी एवं इस्लामी अध्ययन में ऐतिहासिक योगदान पर दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार का उद्घाटन:
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के अरबी विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय सेमिनार “अवध का अरबी एवं इस्लामिक अध्ययन में योगदान” का दोपहर 12.30 बजे सभागार में भव्य उद्घाटन समारोह संपन्न हुआ।
कार्यक्रम की शुरुआत विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. अजय तनेजा द्वारा अतिथियों के स्वागत से हुई। कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने अपने अध्यक्षीय उद्गार में कहा कि “यह सेमिनार अवध की सांस्कृतिक धरोहर को संरक्षित करने का माध्यम बनेगा और युवा पीढ़ी को प्रेरित करेगा।” प्रो तनेजा ने कहा कि भाषा विश्वविद्यालय की स्थापना का मूल उद्देश्य ही यह है कि भाषाओं के माध्यम से समाज और मानवता के बीच बेहतर समझ, सहअस्तित्व और प्रगति की राह खोली जाए। अरबी भाषा इस दृष्टि से विशेष महत्व रखती है. मुख्य अतिथि भाषा विश्वविद्यालय (केएमसीएलयू) के पूर्व कुलपति डॉ अनीस अंसारी ने अपने सम्बोधन में कहा कि अरबी सिर्फ़ एक भाषा नहीं, बल्कि इल्म, तहज़ीब और रूहानी विरासत की एक पूरी दुनिया है। अरबी के ज़रिये न सिर्फ़ इस्लामी दुनिया की क्लासिकी किताबों तक हमारी पहुंच बनती है, बल्कि आज के दौर में खाड़ी देशों और अरब दुनिया से जुड़े रोज़गार, व्यापार और कूटनीतिक रिश्तों के नए दरवाज़े भी खुलते हैं।
कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए मुख्य अतिथि दानिश आज़ाद अंसारी, राज्य मंत्री, अल्पसंख्यक कल्याण और मुस्लिम वक्फ एवं हज़, उप्र सरकार ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार की सोच साफ़ है शिक्षा, हुनर और रोज़गार के बेहतर अवसर हर वर्ग तक पहुँचें। अल्पसंख्यक समाज के नौजवान अगर अरबी के साथ–साथ अंग्रेज़ी, कंप्यूटर और अन्य तकनीकी कौशल भी हासिल करें, तो वे किसी भी मैदान में पीछे नहीं रहेंगे। हमारी कोशिश है कि मदरसों और उच्च शिक्षण संस्थानों में भाषा शिक्षा को आधुनिक ज़रूरतों से जोड़ा जाए, ताकि एक मदरसे का छात्र भी यह ख्वाब देख सके कि वह अरबी जानकर आईएएस, प्रोफेसर, दुभाषिया या अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने वाला प्रोफेशनल बन सकता है।कीनोट स्पीकर प्रो ओबेदुल्लाह फहद ने कहा कि “अवध की अरबी विद्वता का केंद्र लखनऊ रहा है, जहां मौलाना अब्दुल हई फरंगी महली, मौलाना अब्दुल बाकी लखनवी और अल्लामा, शुजाद्दीन लखनवी जैसे महान विद्वानों ने फिक्ह, हदीस और तफसीर पर अमूल्य ग्रंथ रचे। नवाबी काल में स्थापित नादवतुल उलेमा और फिरंगी महल ने इस्लामी शिक्षा को आधुनिक आयाम दिए। आज के दौर में इनकी प्रासंगिकता और भी बढ़ गई है।”
सेमिनार संयोजक प्रो मसूद आलम, अरबी विभागाध्यक्ष ने स्वागत भाषण में बताया कि यह सेमिनार 10-11 फरवरी को आयोजित हो रहा है, कार्यक्रम में 3 से अधिक देशों से जिसमें 15 से अधिक संस्थानों से 200 से अधिक विद्वान, शोधार्थी और छात्र भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा, “अवध ने अरबी साहित्य में उर्दू-अरबी संमिश्रण को जन्म दिया, जो भारतीय इस्लामी चिंतन की विशेषता है।” उद्घाटन सत्र के दौरान प्रो मसूद आलम, डॉ अब्दुल हफ़ीज़, डॉ नीरज शुक्ला, डॉ जफरुन नकी, डॉ नसीब, डॉ मुंतजित मुज्जमिल सहित सभी शिक्षक, विद्यार्थी और प्रतिभागी भारी संख्या में उपस्थित रहे.