महिलाओं की प्रगति के बिना समाज और राष्ट्र का समग्र विकास संभव नहीं — कुलपति
आजमगढ़। महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय परिसर में अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एक विचार गोष्ठी एवं जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम विश्वविद्यालय की राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई के तत्वावधान में समन्वयक डॉ. देवेंद्र पांडेय के मार्गदर्शन में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में महिलाओं के अधिकार, सम्मान और सशक्तिकरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा युवाओं में समानता और सामाजिक जिम्मेदारी की भावना को प्रोत्साहित करना रहा।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि महिलाओं की प्रगति ही समाज और राष्ट्र की प्रगति का वास्तविक आधार है। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति में नारी को सदैव उच्च स्थान दिया गया है और वर्तमान समय में महिलाएँ शिक्षा, विज्ञान, प्रशासन, राजनीति, साहित्य, खेल और सामाजिक जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनी प्रतिभा और क्षमता का उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी विकसित राष्ट्र की पहचान वहाँ की महिलाओं की स्थिति, सुरक्षा और सहभागिता से होती है।
कुलपति ने कहा कि महिलाओं को शिक्षा, आत्मनिर्भरता और नेतृत्व के अवसर प्रदान करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। यदि महिलाओं को समान अवसर और सुरक्षित वातावरण मिले तो वे समाज के हर क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान दे सकती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालय का प्रयास है कि छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शोध, नवाचार और नेतृत्व विकास के बेहतर अवसर उपलब्ध कराए जाएँ, जिससे वे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ें और राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकें।
इस अवसर पर वक्ता हिना देसाई ने कहा कि महिला दिवस केवल उत्सव का दिन नहीं है, बल्कि यह समानता, सम्मान और अधिकारों के प्रति संकल्प लेने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि आज की महिला शिक्षा, प्रशासन, विज्ञान और सामाजिक नेतृत्व के क्षेत्र में निरंतर आगे बढ़ रही है। समाज में महिलाओं के प्रति सम्मान और समान अवसर सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे अपने व्यवहार और विचारों में समानता और सम्मान की भावना को अपनाएँ, तभी एक समतामूलक और प्रगतिशील समाज का निर्माण संभव होगा।
कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के वित्त अधिकारी जे. एन. झा ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए शिक्षा सबसे प्रभावी माध्यम है। उन्होंने कहा कि समाज में सकारात्मक परिवर्तन तभी संभव है जब महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में समान भागीदारी मिले और उन्हें अपनी प्रतिभा के अनुरूप आगे बढ़ने के अवसर प्रदान किए जाएँ।
इस अवसर पर छात्र-छात्राओं के बीच पोस्टर एवं रंगोली प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। पोस्टर प्रतियोगिता में नामरा बेग ने प्रथम, युग सोनी ने द्वितीय तथा वंशिका मौर्या ने तृतीय स्थान प्राप्त किया। रंगोली प्रतियोगिता में वंशिका मौर्या, रिया भारती और खुशी यादव की टीम को प्रथम स्थान मिला। युग सोनी, कविता प्रजापति, सलोनी गौतम और ज्योत्सना खरवार को द्वितीय तथा नीरज यादव, प्रतिमा यादव और ब्यूटी यादव को तृतीय स्थान प्रदान किया गया।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. मनीषा सिंह ने किया। समापन अवसर पर डॉ. शशि प्रकाश शुक्ल ने सभी अतिथियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया।इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कार्यक्रम अधिकारी डॉ. हरेन्द्र प्रजापति सहित अनेक शिक्षक, अधिकारी, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे।