भाषा विवि में हुआ अरबी और इस्लामी अध्ययन का अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य समापन
ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय के अरबी विभाग द्वारा आयोजित 'अवध के अरबी एवं इस्लामी अध्ययन में ऐतिहासिक योगदान पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का समापन अटल सभागार में संपन्न हुआ.
संगोष्ठी में देश-विदेश के विद्वानों, शोधकर्ताओं और विशेषज्ञों ने भाग लिया। पहले दिन विभिन्न सत्रों में अवध क्षेत्र के अरबी साहित्य, इस्लामी विद्या और ऐतिहासिक योगदान पर गहन चर्चा हुई। समापन सत्र में मुख्य अतिथि ने प्रतिभागियों के योगदान की सराहना की तथा इस दिशा में आगे के शोध को प्रोत्साहित किया।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा, “यह संगोष्ठी अवध की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने का महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हुई। अरबी विभाग भविष्य में भी ऐसे आयोजनों को जारी रखेगा।”
अरबी विभागाध्यक्ष प्रो मसूद आलम ने बताया कि संगोष्ठी में 50 से अधिक शोध पत्र प्रस्तुत किए गए, जिनमें अवध के प्रमुख विद्वानों के योगदान पर विशेष प्रकाश डाला गया। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र वितरित किए गए। समापन सत्र में प्रख्यात विद्वानों ने अपने विचार साझा किए। प्रो. ओबैदुल्लाह फहद ने सेमिनार की सफलता पर प्रकाश डालते हुए कहा, “सेमिनार में अधिक से अधिक प्रश्नोत्तरी का आयोजन होना चाहिए। इससे चर्चा और गहन होगी।” उन्होंने अवध क्षेत्र में हुए शैक्षणिक कार्यों पर जोर देते हुए कहा कि यह क्षेत्र सदैव शिक्षा का केंद्र रहा है। इतिहासकार प्रो. अजीजुद्दीन तालिब ने अवध की शैक्षणिक राजधानी के गौरवपूर्ण अतीत का जिक्र करते हुए दुख व्यक्त किया, “अंग्रेजों ने अवध की शैक्षणिक राजधानी को लूटकर यहां से ले जाना सुनिश्चित किया, जिससे हमारी विरासत को अपूरणीय क्षति पहुंची।” वहीं, प्रो. मुजीबुर रहमान ने सेमिनार की सफलता की सराहना करते हुए कहा, “यह अत्यंत उत्कृष्ट सेमिनार रहा है।” उन्होंने सभी आयोजकों को हार्दिक धन्यवाद दिया। प्रो. रहमान ने भी समापन अवसर पर सभी आयोजकों को धन्यवाद देते हुए कहा कि यह आयोजन अवधी संस्कृति के अध्ययन में मील का पत्थर साबित होगा। प्रो. सनाउल्लाह ने प्राच्यविदों का विशेष उल्लेख किया, जिन्होंने अवध पर अनेक महत्वपूर्ण पुस्तकें लिखी हैं। उन्होंने इन विद्वानों के कार्यों को अवधी संस्कृति के संरक्षण में अमूल्य बताया।
अन्य वक्ताओं में अब्दुल रकीब साहब ने कहा, “इस सेमिनार से अवध को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिली है।” डॉ. शर्फ आलम ने सभी प्रतिभागियों को बधाई देते हुए सेमिनार की सफलता पर प्रसन्नता जताई। प्रोफेसर कफील अहमद कासमी ने विश्वविद्यालय के उत्कृष्ट आतिथ्य के लिए सभी को धन्यवाद दिया, जबकि प्रोफेसर मसूद आलम ने दूर-दराज से पधारे अतिथियों को विशेष रूप से आभार व्यक्त किया।
समापन सत्र का कुशल संचालन डॉ. मुज़म्मिल करीम ने किया। कार्यक्रम में डॉ. पियूष त्रिवेदी, डॉ. ज़फरुन नकी, डॉ. आयशा शाहनाज़ फातिमा, डॉ. मुदस्सर, डॉ. शचींद्र शेखर, डॉ. मो. नसीब सहित बड़ी संख्या में विद्वान, शोधार्थी, छात्र और शिक्षाविद् उपस्थित रहे.