भारत–चीन संबंधों पर शोध ने सामरिक चुनौतियों और सहयोग की संभावनाओं को किया उजागर
सीएसजेएमयू, कानपुर भारत–चीन संबंधों जैसे अत्यंत समसामयिक और रणनीतिक विषय पर आधारित एक महत्वपूर्ण शोध आज छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU), कानपुर में संपन्न हुआ। शोधार्थी राज कटियार ने अपने शोध-प्रबंध “भारत–चीन संबंध : उभरते मुद्दों और चुनौतियों का विश्लेषणात्मक अध्ययन” पर सफलतापूर्वक हिंदी मौखिकी दी।
शोध में यह स्पष्ट रूप से सामने आया कि सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा भारत–चीन संबंधों की सबसे बड़ी चुनौती बने हुए हैं। अध्ययन के अनुसार सीमा क्षेत्रों में लगातार तनाव और विश्वास की कमी ने द्विपक्षीय रिश्तों को जटिल बना दिया है।
शोध-निष्कर्षों में यह भी रेखांकित किया गया कि चुनौतियों के बावजूद आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर साझेदारी की संभावनाएँ मौजूद हैं, जो दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने में सहायक हो सकती हैं। व्यापार, क्षेत्रीय सहयोग और अंतरराष्ट्रीय संगठनों में समन्वय भविष्य की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
अध्ययन यह भी दर्शाता है कि भारत–चीन संबंधों की भविष्य की रणनीति केवल द्विपक्षीय स्तर तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें अन्य देशों का प्रभाव और वैश्विक पहलें भी निर्णायक भूमिका निभाती हैं। बदलते वैश्विक शक्ति-संतुलन में इन कारकों की भूमिका लगातार बढ़ रही है।
शोध का सामाजिक प्रभाव भी महत्वपूर्ण बताया गया है। इस अध्ययन से आम नागरिकों और नीति से जुड़े वर्ग को भारत–चीन संबंधों की वास्तविकताओं को समझने में सहायता मिलेगी, जिससे समाज में सूचना-आधारित विमर्श और जागरूकता को बढ़ावा मिलेगा।
शोध-कार्य का निर्देशन डॉ. अभ्य राज सिंह द्वारा किया गया। अपने अनुभव साझा करते हुए शोधार्थी राज कटियार ने कहा कि चुनौतियों और वैचारिक मतभेदों के बावजूद यह शोध भारत–चीन संबंधों की जटिल वास्तविकताओं को समझने की एक सार्थक यात्रा रहा। उन्होंने आशा व्यक्त की कि यह अध्ययन भविष्य में संवाद, सहयोग और संतुलित नीति-निर्माण के लिए नई दिशाएँ प्रदान करेगा।
इस अवसर पर शोधार्थी ने डीन, अनुसंधान एवं विकास डॉ. नामिता तिवारी एवं उनकी टीम के मार्गदर्शन व सहयोग हेतु हार्दिक आभार व्यक्त किया।