महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय की असिस्टेंट प्रोफेसर अर्पिता मिश्रा को पी-एच.डी. की उपाधि
आजमगढ़। महाराजा सुहेल देव विश्वविद्यालय के पर्यटन एवं आतिथ्य विभाग की सहायक प्रोफेसर अर्पिता मिश्रा को “अयोध्या के विशेष संदर्भ में धार्मिक पर्यटन के उभरते आयाम एवं प्रभावी आपूर्ति श्रृंखला के विकास की चुनौतियाँ” विषय पर पी-एच.डी. की उपाधि प्रदान की गई है। उन्होंने यह शोध बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झाँसी से प्रो. प्रतीक अग्रवाल के निर्देशन में पूर्ण किया।
अर्पिता मिश्रा का यह शोध अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के बाद धार्मिक पर्यटन में आए तीव्र बदलावों और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों का व्यापक विश्लेषण प्रस्तुत करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य धार्मिक पर्यटन के विस्तार के साथ एक सुदृढ़ और प्रभावी पर्यटन आपूर्ति श्रृंखला (टूरिज्म सप्लाई चेन) के विकास में आने वाली व्यावहारिक चुनौतियों को समझना रहा।
शोध निष्कर्षों के अनुसार, धार्मिक पर्यटन के बढ़ते प्रभाव से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। होटल, परिवहन, हस्तशिल्प, मार्गदर्शक सेवाओं और लघु व्यापार से जुड़े लोगों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। साथ ही सड़क, स्वास्थ्य सेवाओं, बैंकिंग सुविधाओं और अन्य सार्वजनिक अवसंरचनाओं में भी सुधार देखने को मिला है। क्षेत्र में संपत्ति मूल्यों में वृद्धि ने भी आर्थिक गतिविधियों को नई गति दी है।हालाँकि, अध्ययन यह भी रेखांकित करता है कि तीर्थयात्रियों की बढ़ती संख्या के कारण भीड़-भाड़, पर्यावरणीय दबाव, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन की समस्या तथा सांस्कृतिक और आध्यात्मिक पहचान के संरक्षण जैसी चुनौतियाँ उभरकर सामने आई हैं। इन चुनौतियों का समाधान किए बिना पर्यटन विकास दीर्घकालिक रूप से संतुलित नहीं रह सकता।
अर्पिता मिश्रा ने अपने शोध में सुझाव दिया है कि यदि सरकार, निजी क्षेत्र और स्थानीय समुदाय के बीच समन्वित प्रयास सुनिश्चित किए जाएँ तथा सतत विकास की नीतियों को प्रभावी प्रबंधन तंत्र के साथ लागू किया जाए, तो अयोध्या न केवल एक प्रमुख राष्ट्रीय धार्मिक तीर्थस्थल के रूप में सुदृढ़ होगी, बल्कि सतत धार्मिक पर्यटन के वैश्विक मॉडल के रूप में भी स्थापित हो सकती है।
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार एवं शिक्षाविदों ने अर्पिता मिश्रा की इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे शैक्षणिक जगत के लिए प्रेरणादायक बताया है।