भाषा विश्वविद्यालय में ‘दीक्षोत्सव–2026’ की धूम: परिसर से लेकर गोद लिए गए गांवों तक सांस्कृतिक, साहित्यिक एवं खेल गतिविधियों का उत्साह
लखनऊ, 30 जून 2026। ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ में आगामी 11वें दीक्षांत समारोह के पूर्व आयोजित ‘दीक्षोत्सव–2026’ के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर एवं विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों में विविध सांस्कृतिक, साहित्यिक और खेल गतिविधियों का उत्साहपूर्वक आयोजन किया जा रहा है। इन आयोजनों में विद्यार्थियों, शिक्षकों एवं ग्रामीण युवाओं की उल्लेखनीय सहभागिता देखने को मिल रही है।
दीक्षोत्सव के अंतर्गत विश्वविद्यालय परिसर तथा गोद लिए गए गांवों में भाषण प्रतियोगिता, कहानी लेखन, काव्य पाठ, चित्रकला (आर्ट) प्रतियोगिता एवं विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जा रहा है। इन गतिविधियों का उद्देश्य विद्यार्थियों की रचनात्मक क्षमता, नेतृत्व कौशल और अभिव्यक्ति को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में छिपी प्रतिभाओं को पहचानकर उन्हें मंच प्रदान करना है। विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी गांवों में पहुंचकर प्रतियोगिताओं के सफल संचालन में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं, जिससे शिक्षा और समाज के बीच सहभागिता को नई मजबूती मिल रही है।
माननीय कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा, “दीक्षोत्सव हमारे विश्वविद्यालय की उस सोच का प्रतीक है जिसमें शिक्षा को समाज से जोड़कर देखा जाता है। कक्षा की सीमाओं से बाहर निकलकर विद्यार्थियों को रचनात्मक अभिव्यक्ति, नेतृत्व और सामाजिक उत्तरदायित्व के अवसर प्रदान करना ही वास्तविक शिक्षा है। यह अत्यंत संतोष का विषय है कि हमारे शिक्षक एवं विद्यार्थी गोद लिए गए गांवों में पहुंचकर स्थानीय प्रतिभाओं को प्रोत्साहित कर रहे हैं। सांस्कृतिक, साहित्यिक और खेल गतिविधियों के माध्यम से युवाओं में आत्मविश्वास, प्रतिस्पर्धा की स्वस्थ भावना और सामाजिक सहभागिता का विकास हो रहा है, जो विकसित भारत के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।”
कार्यक्रम की संयोजक डॉ. नलिनी मिश्रा ने कहा, “दीक्षोत्सव का उद्देश्य विश्वविद्यालय परिसर और गोद लिए गए गांवों की प्रतिभाओं को एक साझा मंच प्रदान कर उनकी रचनात्मक क्षमता को नई पहचान देना है।”
विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि दीक्षोत्सव–2026 के अंतर्गत आयोजित ये विविध कार्यक्रम विद्यार्थियों एवं ग्रामीण युवाओं के व्यक्तित्व विकास, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक सहभागिता को नई दिशा प्रदान करते हुए विश्वविद्यालय और समाज के बीच संबंधों को और अधिक सुदृढ़ बना रहे हैं।