विश्वविद्यालय में मनाया गया विश्व नवकार महामन्त्र दिवस

Update: 2026-04-09 14:11 GMT


छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर (उ.प्र.) में विश्व शान्ति और वैश्विक सद्भाव की कामना को लेकर 9 अप्रैल, 2026 को सेनानायक तात्या टोपे सीनेट हॉल (सीएसजेएमयू) में भारत सहित विश्व के 108 देशों के साथ विश्वविद्यालय में माननीय कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक जी के मार्गदर्शन एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक, उप-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी, कुलसचिव श्री राकेश कुमार मिश्र की उपस्थिति में सामूहिक नवकार महामंत्र की आराधना की गयी |

कार्यक्रम का शुभारम्भ मंगलाचरण के साथ आचार्य राहुल जैन एवं आर्जव जैन ने नवकार महामंत्र के जयघोष के साथ किया | जिसमें संगीत विभाग के डॉ. आर. के. त्रिपाठी एवं उनके छात्र-छात्राओं ने संगीत ध्वनि के माध्यम से जाप अनुष्ठान में साथ दिया | मंच का संचालन सी.ए. अरविंद जैन एवं आभार-ज्ञापन डॉ. सर्वेश मणि त्रिपाठी जी ने किया |

अतिथियों का स्वागत आचार्य विद्यासागर सुधासागर जैन शोध पीठ के निदेशक प्रो. अशोक कुमार जैन ने अपने स्वागत वक्तव्य के द्वारा किया | माननीय कुलपति जी ने अध्यक्षीय वक्तव्य में संबोधित करते हुए कहा कि विश्व के सभी धर्म ग्रंथों में सर्वप्रथम मंगलाचरण लिपिबद्ध होता है और मन्त्र ध्वनी तरंगों के प्रभाव से आध्यात्मिक शान्ति और सद्भावना व्याप्त होती है | णमोकार महामंत्र सर्वप्रथम दिगम्बर जैन परम्परा के षटखंडागम में आचार्य पुष्पदंत भूतबली ने लिखा इसके प्राचीन शिलालेख राजा खारवेल द्वारा खंडगिरी, उदयगिरी में द्वितीय शताब्दी में टंकित कराया गया था | प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी जी ने कहा कि णमोकार महामंत्र में पांच दिव्य आत्माओं को नमन किया गया है | जिसमें प्रथम श्रृंखला में अरिहंत को जिसका तात्पर्य जो राग द्वेषरूपी शत्रु पर विजय प्राप्त करते हैं ये शत्रु कहीं बाहर से नहीं आते ये शत्रु लोभ, मोह, क्रोध, द्वेष अपने ही अंदर विद्यमान होता है जो इन पर विजय प्राप्त करे वह अरिहंत होता है |

दूसरे क्रम में सिद्ध हैं जो मुक्ति को प्राप्त कर चुके हैं | कुलसचिव श्री राकेश कुमार मिश्र जी ने कहा कि यह णमोकार दिवस एक आयोजन नहीं बल्कि आत्म-चिंतन, आत्म-शुद्धि, आध्यात्मिक उन्नति का एक महत्वपूर्ण अवसर है |

इसकी महत्ता किसी एक धर्म तक ही सीमित नहीं है, यह सम्पूर्ण मानवता के लिए शान्ति, समता,सद्भाव का सन्देश देता है | आयुर्वेदाचार्य डॉ. वंदना पाठक जी ने बताया कि भारतीय आयुर्वेदा में जो आहार पद्धति है उसके बारे में जैन समाज के ग्रंथों में बहुत कुछ मिलता है | जैन आहार हमारी आध्यात्मिक शक्ति, और ऊर्जा को बढ़ाने में कार्यकारी होता है, पूज्य मुनि श्री सुधासागर जी महाराज के आशीर्वाद से वर्तमान में देश-विदेश में जैन आहार सभी को प्राप्त हो रहा है | भारतीय समाज को पूर्ण शाकाहार पालन कराने में यह जैन समाज एवं ऋषि-मुनियों का अमूल्य योगदान है | आज नवकार दिवस पर मन्त्र की सकारात्मक ऊर्जा के द्वारा अपने शरीर एवं आत्मा को पवित्र करेंगे, जिससे समाज और देश में शान्ति, सद्भाव स्थापित हो सके |

कार्यक्रम में जैन समाज के श्रेष्ठीवर्ग, विद्वान वर्ग एवं विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राएं एवं शिक्षकगण उपस्थित रहे | श्री प्रदीप जैन ‘तिजारा’, श्री कमल जैन, श्री अमोद जैन, डॉ. श्रवण कुमार यादव, डॉ. रामकिशोर योग में अध्ययनरत सभी छात्रों सहित उपस्थित रहें | बालिका छात्रावास से डॉ. सोनी गुप्ता छात्राओं सहित कार्यक्रम में उपस्थित रहीं | डॉ. कोमलचंद्र जैन, श्री राजीव जैन, डॉ. मिठाई लाल, डॉ. दिवाकर अवस्थी, डॉ. हरिओम, डॉ. प्रभात गौरव मिश्र, श्री रवि जैन, विवेक कुमार, जितेन्द्र कुमार यादव, अंशू जैन, ममता जैन, प्रज्ञा जैन, शिखा जैन, श्वेता जैन, शैली जैन, रेनू जैन आदि उपस्थित रहें |

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