अनेकता में एकता’ का जीवंत उत्सव बना गुजरात दिवस, संस्कृति, सेवा और सामाजिक सरोकारों से सराबोर रहा आयोजन

Update: 2026-05-01 13:51 GMT


विश्व में अनुपम है भारतीय संस्कृति और हिंदुस्तानी विरासत : प्रो. संजीव कुमार


आजमगढ़, संवाददाता।

महाराजा सुहेलदेव विश्वविद्यालय, आजमगढ़ में कुलाधिपति श्रीमती आनंदीबेन पटेल के निर्देश तथा विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. संजीव कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित गुजरात दिवस समारोह राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक विविधता और सामाजिक समरसता का अद्वितीय उत्सव बन गया। विश्वविद्यालय परिसर से लेकर महर्षि चंद्रमा ऋषि आश्रम तक पूरे दिन उत्सव, उल्लास, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक चेतना का अद्भुत वातावरण बना रहा।

इस भव्य आयोजन में बच्चों, युवाओं, बुजुर्गों, शिक्षकों, कर्मचारियों और क्षेत्रवासियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता निभाई। गुजरात की समृद्ध लोकसंस्कृति, परंपराओं, कला, संगीत और जीवन-मूल्यों से रूबरू होकर सभी ने स्वयं को भारतीय संस्कृति की विराट धारा से जुड़ा हुआ महसूस किया। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी तथा लौह पुरुष सरदार वल्लभभाई पटेल की कर्मभूमि गुजरात के ऐतिहासिक योगदान का स्मरण करते हुए वक्ताओं ने कहा कि भारत की स्वतंत्रता से लेकर आधुनिक राष्ट्र निर्माण तक गुजरात की भूमिका सदैव प्रेरणादायी रही है।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुलपति प्रो. Sanjeev Kumar संजीव कुमार ने दीप प्रज्वलित कर एवं मां सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पित कर किया। इसके पश्चात फीता काटकर विविध कार्यक्रमों का विधिवत उद्घाटन किया गया। कुलपति ने सर्वप्रथम कबड्डी खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त कर उनका उत्साहवर्धन किया। इसके बाद उन्होंने क्षय रोग से पीड़ित 30 मरीजों को पोषण पोटली वितरित कर विश्वविद्यालय की सामाजिक प्रतिबद्धता का संदेश दिया। महर्षि चंद्रमा ऋषि के पावन स्थल पर दर्शन-पूजन के उपरांत वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश भी दिया गया।

अपने प्रेरक संबोधन में कुलपति प्रो. संजीव कुमार ने कहा कि भारत विविधताओं का अद्भुत देश है। यहां भाषा, वेशभूषा, खानपान और जीवनशैली में भिन्नता होने के बावजूद जो अटूट एकता और अखंडता दिखाई देती है, वही भारत की सबसे बड़ी शक्ति है। उन्होंने कहा कि विदेशों में जब कोई भारतीय स्वयं को भारतवासी कहता है, तब वहां कश्मीर से कन्याकुमारी तक की एकात्मता की झलक स्पष्ट दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि अनेकता में एकता सरीखी हिंदुस्तानी विरासत पूरे विश्व में दुर्लभ है और यही हमारी सांस्कृतिक महानता का मूल आधार है।

उन्होंने कहा कि गुजरात दिवस मनाने का उद्देश्य केवल एक प्रदेश की संस्कृति का उत्सव मनाना नहीं, बल्कि देश के विभिन्न प्रांतों की सांस्कृतिक विशेषताओं को जन-जन तक पहुंचाना है, ताकि भारत की साझा विरासत और राष्ट्रीय एकता की भावना और अधिक सुदृढ़ हो सके। उन्होंने अपने विदेश भ्रमण के अनुभव साझा करते हुए कहा कि विश्व के अनेक देशों की यात्रा के बाद वह पूरे विश्वास के साथ कह सकते हैं कि “सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा” केवल कविता की पंक्ति नहीं, बल्कि भारत की आत्मा का सजीव उद्घोष है।

समारोह के अंतर्गत प्रातःकाल विश्वविद्यालय से एक विशेष दल को पड़ोसी राज्य बिहार के शैक्षिक एवं सांस्कृतिक भ्रमण के लिए हरी झंडी दिखाकर रवाना किया गया। विश्वविद्यालय द्वारा गोद लिए गए गांवों के कंपोजिट विद्यालयों में स्वच्छता अभियान चलाया गया तथा बच्चों में टॉफी और बिस्किट वितरित किए गए। खेल गतिविधियों के अंतर्गत कबड्डी, वॉलीबॉल एवं योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

इसके साथ ही ‘बापू बाजार’ का उद्घाटन किया गया, जहां आसपास के गांवों से आए गरीब एवं जरूरतमंद परिवारों को नाममात्र शुल्क पर वस्त्र, पुस्तकें, कॉपियां, खिलौने और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई गई। इस मानवीय पहल ने कार्यक्रम को सामाजिक संवेदनशीलता से जोड़ते हुए जनसेवा का उत्कृष्ट उदाहरण प्रस्तुत किया।

सांस्कृतिक कार्यक्रमों में गरबा, गुजराती लोकनृत्य, गुजराती काव्य-पाठ एवं रंगारंग प्रस्तुतियों ने पूरे वातावरण को गुजरातमय बना दिया। विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने दर्शकों का मन मोह लिया। कुलपति ने उत्कृष्ट प्रस्तुतियों के लिए प्रतिभागियों को नगद पुरस्कार देकर सम्मानित एवं प्रोत्साहित किया।

इस अवसर पर निःशुल्क पेयजल, कॉपी, पुस्तकें, पेंसिल, रबर तथा अन्य उपयोगी सामग्री के वितरण की व्यवस्था की गई। सभी आगंतुकों के लिए जलपान एवं भोजन की समुचित व्यवस्था भी की गई। राष्ट्रीय सेवा योजना के स्वयंसेवकों ने घाटों की स्वच्छता कर सामाजिक उत्तरदायित्व का अनुकरणीय परिचय दिया।

कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के प्राध्यापकों, प्राचार्यों, शिक्षकों, कर्मचारियों, छात्र-छात्राओं तथा बड़ी संख्या में क्षेत्रवासियों की गरिमामयी उपस्थिति रही। अंत में विश्वविद्यालय की ओर से प्रसाद स्वरूप सामूहिक भोजन का आयोजन किया गया, जिसमें सभी ने सहभागिता कर सामाजिक समरसता और भारतीय सांस्कृतिक मूल्यों को आत्मसात किया।

यह आयोजन केवल गुजरात दिवस का उत्सव नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति की विराटता, सामाजिक सेवा की भावना और राष्ट्रीय एकता के अमर संदेश का जीवंत उत्सव बन गया।

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