सुसाइड के खिलाफ भाषा विवि की मुहिम, ‘वॉल ऑफ होप’ ने जगाई उम्मीद

लखनऊ। विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में मानसिक स्वास्थ्य और आत्महत्या रोकथाम को लेकर जागरूकता की मुहिम चलाई गई। विश्वविद्यालय के नवस्थापित मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित विभिन्न कार्यक्रमों में विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक भागीदारी की और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहने के साथ-साथ मुश्किल समय में एक-दूसरे का साथ देने का संदेश दिया।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा के नेतृत्व में मनोविज्ञान विभाग ने 1 से 10 सितम्बर तक ‘वॉल ऑफ होप’ पहल आयोजित की। विश्वविद्यालय के विभिन्न विभागों में संचालित इस पहल के तहत विद्यार्थियों ने दीवार पर अपने संदेश लिखकर उम्मीद, सकारात्मकता और भावनात्मक सहयोग का संदेश दिया। विद्यार्थियों की ओर से इस पहल को उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली।

10 सितम्बर को विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस के अवसर पर मनोविज्ञान विभाग ने स्लोगन लेखन प्रतियोगिता का आयोजन किया। विभिन्न विभागों के विद्यार्थियों ने इसमें भाग लेते हुए मानसिक स्वास्थ्य और जीवन के प्रति सकारात्मक सोच से जुड़े प्रभावी स्लोगन लिखे। विद्यार्थियों की रचनाओं में मानसिक स्वास्थ्य को लेकर उनकी समझ और संवेदनशीलता साफ नजर आई।

इसी क्रम में ‘What’s Your Next Move? – A Real-Life Mental Health and Growth Experience’ विषय पर संवादात्मक एवं जानकारीपूर्ण सत्र भी आयोजित किया गया। MyUni Global की टीम ने विद्यार्थियों से संवाद करते हुए मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता, आत्मचिंतन और जरूरत पड़ने पर समय रहते सहायता लेने के महत्व पर चर्चा की। विद्यार्थियों को संदेश दिया गया कि मानसिक परेशानी को चुपचाप सहने के बजाय अपनी बात साझा करना और आवश्यकता होने पर मदद लेना जरूरी है।

‘मदद मांगना कमजोरी नहीं, साहस है’

कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर समाज में जागरूकता बढ़ाने के साथ संवेदनशील वातावरण तैयार करना आज की महत्वपूर्ण जरूरत है। उन्होंने कहा कि किसी व्यक्ति की परेशानी को समझना, उसकी बात को ध्यान से सुनना और जरूरत के समय उसका साथ देना हम सभी की जिम्मेदारी है।

उन्होंने कहा, “विद्यार्थी जीवन में पढ़ाई, करियर और व्यक्तिगत परिस्थितियों से जुड़ा तनाव कई बार युवाओं के लिए बड़ी चुनौती बन जाता है। ऐसे समय में उन्हें यह भरोसा होना चाहिए कि वे अकेले नहीं हैं। अपनी परेशानी किसी से साझा करना और जरूरत पड़ने पर मदद लेना कमजोरी नहीं, बल्कि साहस है। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि विद्यार्थियों को ऐसा सकारात्मक और संवेदनशील वातावरण मिले, जहां वे बिना झिझक अपनी बात रख सकें।”

प्रो. तनेजा ने कहा कि ‘वॉल ऑफ होप’ केवल एक जागरूकता गतिविधि नहीं, बल्कि उम्मीद और जीवन के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण का संदेश देने वाली पहल है। उन्होंने विद्यार्थियों से अपील की कि वे अपने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सजग रहें और यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति भावनात्मक कठिनाई से गुजर रहा हो तो उसकी बात सुनें तथा जरूरत पड़ने पर उसे उचित सहायता लेने के लिए प्रोत्साहित करें।

मनोविज्ञान विभाग की ओर से आयोजित इन कार्यक्रमों का समापन विद्यार्थियों के बीच मानसिक स्वास्थ्य को लेकर सकारात्मक संवाद और “मुश्किल वक्त में चुप न रहें, बात करें और मदद लें” जैसे महत्वपूर्ण संदेश के साथ हुआ।