नौकरी तलाशने वाले नहीं, नौकरी देने वाले युवा बनें : कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय
*झांसी।* बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय ने विद्यार्थियों का आह्वान किया कि वे केवल नौकरी प्राप्त करने का लक्ष्य लेकर आगे न बढ़ें, बल्कि नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता के माध्यम से **नौकरी देने वाले युवा बनने का संकल्प लें। उन्होंने कहा कि इंजीनियर की वास्तविक पहचान केवल उसके तकनीकी ज्ञान से नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं को समझकर उनके उपयोगी, वैज्ञानिक और दीर्घकालिक समाधान विकसित करने की क्षमता से होती है।
कुलपति प्रो. मुकेश पांडेय मंगलवार को बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के इंस्टीट्यूट ऑफ इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी द्वारा गांधी सभागार में आयोजित *इंजीनियर्स डे 2026* समारोह को संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम उनकी अध्यक्षता में तथा विशिष्ट अतिथि श्री मनीष कुमार राय, प्रांत संगठन मंत्री, अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की गरिमामयी उपस्थिति में संपन्न हुआ। इस अवसर पर डीन इंजीनियरिंग प्रो. एम. एम. सिंह, निदेशक इंजीनियरिंग प्रो. डी. के. भट्ट तथा इंजीनियरिंग समन्वयक इं. शशिकांत वर्मा सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक, कर्मचारी एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
कुलपति प्रो. पांडेय ने विद्यार्थियों को इंजीनियरिंग के महत्व से अवगत कराते हुए कहा कि तकनीकी शिक्षा का उद्देश्य केवल डिग्री या रोजगार प्राप्त करना नहीं होना चाहिए। विद्यार्थियों को अपने ज्ञान का उपयोग समाज की वास्तविक समस्याओं के समाधान के लिए करना चाहिए। उन्होंने कहा कि आज का समय नवाचार, स्टार्टअप और उद्यमिता का है। युवाओं को ऐसी तकनीक और उत्पाद विकसित करने चाहिए, जो स्थानीय समस्याओं का समाधान करने के साथ-साथ रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न करें।
उन्होंने विद्यार्थियों को स्टार्टअप, नवाचार और उद्यमिता से जुड़ी आवश्यक जानकारी एवं व्यावहारिक कौशल विकसित करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य ऐसे युवाओं का निर्माण करना है, जो आत्मनिर्भर हों और राष्ट्र के विकास में तकनीकी योगदान दे सकें।
विशिष्ट अतिथि श्री मनीष कुमार राय ने कहा कि इंजीनियरिंग ऐसी महत्वपूर्ण विधा है, जिसके माध्यम से समाज में व्याप्त अनेक समस्याओं का वैज्ञानिक और तकनीकी समाधान किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा का उपयोग सामाजिक समस्याओं एवं कुरीतियों को दूर करने की दिशा में भी किया जाना चाहिए।
निदेशक इंजीनियरिंग प्रो. डी. के. भट्ट ने विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकों और नवाचार की दिशा में निरंतर आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किसी सिद्धांत या नियम को केवल सैद्धांतिक रूप से समझने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उसे प्रयोग में बदलने का प्रयास करना चाहिए। इसके लिए पहले प्रोटोटाइप तैयार किया जाए, फिर उसका परीक्षण एवं प्रदर्शन किया जाए और प्राप्त फीडबैक के आधार पर उसमें आवश्यक सुधार किए जाएं। इस प्रक्रिया से विकसित उत्पाद भविष्य में सफल स्टार्टअप का आधार बन सकता है और समाज के लिए दीर्घकाल तक उपयोगी सिद्ध हो सकता है।
इंजीनियर्स डे के उपलक्ष्य में 12 से 15 सितंबर 2026 तक संस्थान में विभिन्न तकनीकी, रचनात्मक एवं खेल-कूद प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। समापन समारोह में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया।
*तकनीकी क्विज प्रतियोगिता* में प्रथम स्थान इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के हर्ष पांडेय ने प्राप्त किया। कंप्यूटर साइंस तृतीय वर्ष की दिशा ओझा द्वितीय तथा फूड टेक्नोलॉजी द्वितीय वर्ष के सिवेश कर्मा तृतीय स्थान पर रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत आयोजित *हेल्थ चेकअप कैंप* में बायोमेडिकल इंजीनियरिंग के छात्र-छात्राओं आशीष, देवेश पटेल, निसा अहिरवार, नीतेश कुमार वर्मा, पारस, अंजलि, प्रेरणा, शिवम एवं काजल ने सक्रिय सहभागिता की। विद्यार्थियों ने शिक्षकों एवं छात्र-छात्राओं की स्वास्थ्य संबंधी जांच कर उन्हें स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित जानकारी प्रदान की।
*परिपथ निर्माण प्रतियोगिता* में हर्ष पांडेय ने स्मार्ट लॉक सिस्टम का सर्किट डिजाइन कर प्रथम स्थान प्राप्त किया। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष के सुमित ने ओवर-वोल्टेज एवं अंडर-वोल्टेज प्रोटेक्शन डिवाइस तैयार कर द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि प्रथम वर्ष के आरोह गुप्ता ने वॉटर टैंक इंडिकेटर तैयार कर तृतीय स्थान हासिल किया।
*कोड ट्रैकर प्रतियोगिता* में कंप्यूटर साइंस प्रथम वर्ष के कर्मा देव प्रथम, तृतीय वर्ष की शिखा गुप्ता द्वितीय तथा प्रथम वर्ष के अवनीश कुमार जायसवाल तृतीय स्थान पर रहे।
खेल-कूद प्रतियोगिताओं के अंतर्गत कैरम, शतरंज और सुडोकू प्रतियोगिताएं आयोजित की गईं। कैरम में फूड टेक्नोलॉजी तृतीय वर्ष के रवि आर्या प्रथम, कंप्यूटर साइंस प्रथम वर्ष के आयुष कुमार द्वितीय और बायोटेक्नोलॉजी प्रथम वर्ष की अंशिका शर्मा तृतीय स्थान पर रहीं।
शतरंज प्रतियोगिता में कंप्यूटर साइंस अंतिम वर्ष के अवनीश कुमार एवं अभिषेक कुमार ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के आयुष अग्रवाल द्वितीय तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग द्वितीय वर्ष की चित्रा श्री तृतीय स्थान पर रहीं।
सुडोकू प्रतियोगिता में कंप्यूटर साइंस इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष के कौशिक सिंह ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। तृतीय वर्ष के आदर्श सिंह तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग तृतीय वर्ष के आयुष ब्रह्मावत संयुक्त रूप से द्वितीय स्थान पर रहे, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंस्ट्रुमेंटेशन इंजीनियरिंग प्रथम वर्ष की सुरभि विश्वकर्मा ने तृतीय स्थान प्राप्त किया।
सभी विजेता छात्र-छात्राओं को प्रमाणपत्र एवं मेडल प्रदान कर सम्मानित किया गया। विभिन्न प्रतियोगिताओं के सफल आयोजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इवेंट कोऑर्डिनेटर्स को भी स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का मंच संचालन डॉ. अंजिता श्रीवास्तव, डॉ. अंजली श्रीवास्तव, डॉ. साक्षी दुबे एवं डॉ. शुभांगी निगम ने किया। कार्यक्रम के अंत में संयोजक डॉ. अतुल मकराड़िया ने सभी अतिथियों, शिक्षकों, कर्मचारियों एवं विद्यार्थियों के प्रति आभार व्यक्त किया।
इस अवसर पर इं. राजेश वर्मा, डॉ. ताजेन अली, डॉ. मुकुल सक्सेना, डॉ. जाकिर अली, इं. विजय वर्मा, इं. महेंद्र प्रताप सिंह, डॉ. राहुल शुक्ला, डॉ. सत्येंद्र उपाध्याय, डॉ. शालिनी त्रिपाठी, इं. चंपका, इं. गौरव, इं. अनुराग गुप्ता सहित बड़ी संख्या में शिक्षक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे। छात्र-छात्राओं में शोवित सिंह, यथार्थ, आयुष, विशाल और कुलदीप सहित बड़ी संख्या में विद्यार्थियों ने सहभागिता की।
इंजीनियर्स डे का यह आयोजन विद्यार्थियों में तकनीकी कौशल, नवाचार, रचनात्मकता, उद्यमिता, स्वास्थ्य जागरूकता और टीम भावना को प्रोत्साहित करने के साथ-साथ उन्हें समाज एवं राष्ट्र के सतत विकास में इंजीनियर की महत्वपूर्ण भूमिका के प्रति प्रेरित करने वाला रहा।