झाँसी। ओज़ोन परत का संरक्षण केवल पर्यावरण से जुड़ा विषय नहीं, बल्कि मानव जीवन और आने वाली पीढ़ियों के सुरक्षित भविष्य से जुड़ी जिम्मेदारी है। क्लोरोफ्लोरोकार्बन (CFCs) के उपयोग एवं उत्सर्जन को नियंत्रित करने के साथ इनके पर्यावरण-अनुकूल विकल्पों पर शोध को बढ़ावा दिया जाना आवश्यक है। यह बात मुख्य अतिथि उच्च शिक्षा अधिकारी, झाँसी प्रो. सुशील बाबू ने विश्व ओज़ोन दिवस के अवसर पर बुंदेलखंड विश्वविद्यालय में आयोजित कार्यक्रम में कही।

बुंदेलखंड विश्वविद्यालय, झाँसी के इंस्टिट्यूट ऑफ बेसिक साइंस के रसायन विभाग द्वारा बुधवार को विश्व ओज़ोन दिवस 2026 के उपलक्ष्य में विभिन्न जागरूकता एवं रचनात्मक गतिविधियों का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के अंतर्गत क्विज़ प्रतियोगिता, पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता सहित विभिन्न गतिविधियाँ आयोजित की गईं, जिनमें विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक प्रतिभाग किया।

मुख्य अतिथि प्रो. सुशील बाबू ने विद्यार्थियों से ओज़ोन संरक्षण को केवल एक दिवस तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन और वैज्ञानिक शोध से जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ओज़ोन परत पृथ्वी को सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों से सुरक्षा प्रदान करती है। इसलिए इसके संरक्षण के प्रति प्रत्येक व्यक्ति को जागरूक होना चाहिए। उन्होंने विशेष रूप से सीएफसी के उपयोग और उत्सर्जन को कम करने तथा ऐसे विकल्प विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया, जो पर्यावरण को नुकसान न पहुँचाएं।

उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान में युवाओं और शोधार्थियों की महत्वपूर्ण भूमिका है। विश्वविद्यालयों में होने वाले शोध ऐसे होने चाहिए जिनका लाभ समाज और पर्यावरण दोनों को प्राप्त हो। वैज्ञानिक सोच, नवाचार और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार के माध्यम से ओज़ोन संरक्षण की दिशा में प्रभावी योगदान दिया जा सकता है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रो. सुनील काबिया, निदेशक, आईक्यूएसी ने की। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच तथा पर्यावरण संरक्षण की भावना विकसित करने के लिए इस प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावरण संरक्षण को व्यवहार का हिस्सा बनाने की आवश्यकता है और विद्यार्थियों को इस दिशा में नेतृत्व करना चाहिए।

विशिष्ट अतिथि जितेंद्र गौड़, बेसिक शिक्षा अधिकारी, झाँसी ने विद्यार्थियों से जिले के बेसिक शिक्षा विभाग के विद्यालयों में जाकर ओज़ोन संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता से संबंधित कार्यक्रम आयोजित करने का आह्वान किया। उन्होंने अधिक से अधिक वृक्षारोपण करने तथा आमजन को पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने पर भी जोर दिया।

विशिष्ट अतिथि राजबहादुर, परीक्षा नियंत्रक, बुंदेलखंड विश्वविद्यालय ने ओज़ोन परत के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए इसका संरक्षण अत्यंत आवश्यक है।

कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. प्रभात तिवारी, केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय, झाँसी तथा डॉ. मानवेन्द्र सेंगर, विपिन बिहारी कॉलेज, झाँसी ने वर्तमान पर्यावरणीय परिस्थितियों के संदर्भ में ओज़ोन परत के महत्व, इसके क्षरण के कारणों और संरक्षण के उपायों पर विस्तार से चर्चा की।

कार्यक्रम का संयोजन रसायन विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. प्रकाश चंद्र ने किया। आयोजन की रूपरेखा डॉ. धीरेंद्र कुमार शर्मा एवं डॉ. कमलेश बिलगाइया ने तैयार की, जबकि संचालन आयुषी वर्मा ने किया।

आयोजन को सफल बनाने में डॉ. चित्रा गुप्ता, डॉ. अंजू सिंह, डॉ. ममता दशानी, सपना एवं धर्मवीर सहित विभाग के सदस्यों ने सक्रिय सहयोग प्रदान किया। इस अवसर पर डॉ. विजय यादव, डॉ. राजीव सिंह, डॉ. प्रियंका त्रिपाठी, डॉ. वर्षा द्विवेदी, डॉ. कासिम, डॉ. आकाश कुमार, डॉ. आनंद त्रिवेदी, डॉ. मुरली यादव एवं डॉ. विनोद कुमार सहित विश्वविद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।