अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन “International Conference on Advances in Life Sciences (ICALS-2026)” – प्रथम दिवस की झलक
छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी में 12 मार्च 2026 को “इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांसेज इन लाइफ साइंसेज-2026 (ICALS-2026)” का प्रथम दिवस सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह सम्मेलन विश्वविद्यालय के प्रो. कुलपति विनय कुमार पाठक एवं प्रो. कुलपति सुधीर कुमार अवस्थी के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित किया गया, जिसका उद्देश्य जीवन विज्ञान के क्षेत्र में ज्ञान-विनिमय, वैज्ञानिक संवाद और अनुसंधान को प्रोत्साहित करना है।
अपने संबोधन में कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक ने कहा कि हाल के वर्षों में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई ), मशीन लर्निंग और बिग डेटा एनालिटिक्स के समावेशन से बायोसाइंस के क्षेत्र में उल्लेखनीय परिवर्तन आया है। इन तकनीकों ने जीनोमिक्स, ड्रग डिस्कवरी, प्रिसिजन मेडिसिन, बायोइन्फॉर्मेटिक्स, माइक्रोबियल इकोलॉजी और पर्यावरण निगरानी जैसे क्षेत्रों में क्रांतिकारी बदलाव लाए हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ICALS-2026 सार्थक वैज्ञानिक चर्चाओं को बढ़ावा देगा, सहयोगात्मक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा तथा युवा वैज्ञानिकों को नवीन और प्रौद्योगिकी आधारित समाधान खोजने के लिए प्रेरित करेगा।
प्रो-कुलपति प्रो. सुधीर कुमार अवस्थी ने अपने संबोधन में बायोइकोनॉमी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए प्रतिभागियों को भारतीय संदर्भ में डेटा विज्ञान के लिए स्वदेशी डेटा तैयार करने के लिए प्रेरित किया, जिससे भारतीय समुदाय की आवश्यकताओं के अनुरूप उत्कृष्ट अनुसंधान संभव हो सके।
विश्वविद्यालय के कुलसचिव राकेश कुमार मिश्रा ने इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए आयोजन समिति को बधाई दी।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ.अजीत कुमार शासनी, निदेशक, सीएसआईआर राष्ट्रीय वनस्पति अनुसंधान संस्थान, लखनऊ ने पौधों में पाए जाने वाले बायोएक्टिव यौगिकों की भूमिका, पौधों की प्रतिरक्षा प्रणाली में उनकी महत्ता तथा मानव स्वास्थ्य के लिए जैविक खाद्य पदार्थों के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने यह भी कहा कि अब समय आ गया है कि अनुसंधान की दिशा केवल हरित क्रांति से आगे बढ़कर स्वस्थ एवं पोषक फसलों के उत्पादन की ओर केंद्रित की जाए।
पहला कीनोट लेक्चर USA की मिसौरी यूनिवर्सिटी के डॉ. मिन सू ने दिया। लेक्चर में एडवांस्ड क्रायो-इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी टेक्नीक और स्ट्रक्चरल बायोलॉजी में उनके एप्लीकेशन के बारे में जानकारी दी गई।
आमंत्रित वक्ताओं में डॉ. विक्टर विट्वित्स्की (रूसी विज्ञान अकादमी, मॉस्को) ने कोशिकाओं में ग्लाइकोलिसिस की दर के नियमन में एडेनाइलेट किनेज की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इसके बाद डॉ. अनिल कुमार पशुपुलती (हैदराबाद विश्वविद्यालय) ने ग्लोमेरुलर पोडोसाइट्स में माइटोटिक कैटास्ट्रोफी तथा इसके किडनी रोगों से संबंध पर चर्चा की और मोटापा व मधुमेह के प्रभावों को रेखांकित किया। तीसरा आमंत्रित व्याख्यान डॉ. ओम प्रकाश (सिम्बायोसिस इंटरनेशनल यूनिवर्सिटी) द्वारा दिया गया, जिसमें जलवायु परिवर्तन के दौर में एनारोबिक सूक्ष्मजीवों और एनारोबिक प्रक्रियाओं की स्वच्छ ऊर्जा और सतत विकास में भूमिका पर चर्चा की गई। डॉ. प्रियंका चंद्रा (आईसीएआर-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान, करनाल) ने मृदा गुणों तथा उनके फसल उत्पादकता पर प्रभाव पर व्याख्यान दिया।
सम्मेलन के प्रथम दिन 12 मौखिक प्रस्तुतियाँ आयोजित की गईं, जिनमें संकाय सदस्यों एवं शोधार्थियों ने अपने शोध कार्य प्रस्तुत किए। छात्रों की जिज्ञासापूर्ण प्रश्नोत्तरी से सत्र अत्यंत रोचक रहा।
इसके अतिरिक्त लगभग 40 शोध पोस्टरों के साथ पोस्टर सत्र का आयोजन किया गया, जिसका समन्वय डॉ. प्रमोद कुमार यादव ने किया।
उद्घाटन सत्र की शुरुआत प्रो. वर्षा गुप्ता, कॉन्फ्रेंस चेयर के स्वागत संबोधन से हुई, जिसमें उन्होंने मुख्य अतिथि, आमंत्रित वक्ताओं तथा प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए जीवन विज्ञान के क्षेत्र में प्रगति के लिए सहयोगात्मक अनुसंधान के महत्व पर बल दिया। डॉ. अनुराधा कलानी, कॉन्फ्रेंस को-चेयर, ने छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय के स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी की शैक्षणिक एवं शोध उत्कृष्टता पर प्रकाश डालते हुए इसके सशक्त शिक्षण कार्यक्रमों तथा बायोटेक्नोलॉजी और संबद्ध क्षेत्रों में सक्रिय अनुसंधान गतिविधियों का उल्लेख किया। डॉ. राकेश कुमार शर्मा, संयोजक ICALS-2026, ने उपस्थित प्रतिनिधियों एवं प्रतिभागियों को दो दिवसीय सम्मेलन के उद्देश्यों तथा उसकी रूपरेखा की जानकारी दी।
सत्र–I की अध्यक्षता प्रो. रोली शर्मा और डॉ. शिल्पा देशपांडे कैस्थ ने की, जबकि सत्र–II की अध्यक्षता डॉ. राजीव मिश्रा और डॉ. आलोक पांडेय ने की। उद्घाटन सत्र की कार्यवाही का संचालन डॉ. सोनी गुप्ता ने किया तथा डॉ. एकता खरे, संयोजक ICALS-2026, ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। पोस्टर सत्र का समन्वय विनोद कुमार वर्मा और प्रमोद कुमार यादव ने किया, जबकि इसका मूल्यांकन डॉ. नीरजा श्रीवास्तव और डॉ. अजय के. गुप्ता द्वारा किया गया, जिससे युवा शोधकर्ताओं को अपने शोध कार्य प्रस्तुत करने का एक उत्कृष्ट मंच प्राप्त हुआ।
इस अवसर पर डॉ. गौरव, डॉ. दीपेश वर्मा, डॉ. अखिलेंद्र, डॉ. चंद्रेश, डॉ. अन्निका सिंह, डॉ. स्वास्ति श्रीवास्तव, डॉ. मनीषी, डॉ. मधुलिका, डॉ. विशाल तथा डॉ. शाश्वत सहित अनेक संकाय सदस्य उपस्थित रहे। सम्मेलन में 200 से अधिक छात्रों ने सक्रिय रूप से भाग लिया।
सम्मेलन का प्रथम दिवस वैज्ञानिक चर्चाओं, ज्ञानवर्धक व्याख्यानों और शोध संवाद के साथ सफलतापूर्वक सम्पन्न हुआ। यह सम्मेलन जीवन विज्ञान के क्षेत्र में नवाचार, सहयोग और वैश्विक वैज्ञानिक संवाद को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मंच सिद्ध हो रहा है।