ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय में SWAYAM के माध्यम से MOOCs एकीकरण पर कार्यशाला आयोजित

Update: 2026-06-22 14:45 GMT


ख्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के स्वयं लोकल चैप्टर द्वारा “Integrating MOOCs Through SWAYAM” विषय पर एक दिवसीय संकाय विकास कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला का आयोजन विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. अजय तनेजा के संरक्षण एवं मार्गदर्शन में किया गया तथा इसका संयोजन विश्वविद्यालय की स्वयं नोडल अधिकारी डॉ. रुचिता सुजई चौधरी ने किया।

कार्यशाला का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020, राष्ट्रीय क्रेडिट फ्रेमवर्क (NCrF) तथा UGC SWAYAM Regulations के अनुरूप विश्वविद्यालय में मूक्स आधारित शिक्षण को बढ़ावा देना, विभागीय पाठ्यक्रमों के साथ स्वयं को एकीकृत करना तथा विद्यार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण डिजिटल शिक्षण अवसर सुनिश्चित करना था।

कार्यशाला में शिक्षकों के लिए अपने संदेश में कुलपति प्रो. अजय तनेजा ने कहा कि “स्वयं केवल एक ऑनलाइन शिक्षण मंच नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और लचीली उच्च शिक्षा की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। विश्वविद्यालय के सभी विभागों को विद्यार्थियों की शैक्षणिक एवं कौशलगत आवश्यकताओं के अनुरूप स्वयं पाठ्यक्रमों को अपनाते हुए अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में कार्य करना चाहिए।”

कार्यशाला के दौरान स्वयं नोडल अधिकारी डॉ. रुचिता सुजय चौधरी ने आगामी सत्र के लिए विश्वविद्यालय की स्वयं कार्ययोजना प्रस्तुत करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य स्वयं को केवल एक वैकल्पिक मंच के रूप में नहीं बल्कि शिक्षण-अधिगम प्रक्रिया के अभिन्न अंग के रूप में स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि प्रत्येक विभाग को अपने पाठ्यक्रमों के अनुरूप स्वयं मूक्स की पहचान कर उनका करिक्यूलम मैपिंग करना होगा तथा विभागवार अनुमोदित पाठ्यक्रमों की सूची तैयार कर विद्यार्थियों को समयबद्ध रूप से उपलब्ध करानी होगी।

डॉ. चौधरी ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि आगामी सेमेस्टर में प्रत्येक विभाग विद्यार्थियों को स्वयं पाठ्यक्रमों में पंजीकरण के लिए प्रेरित करे तथा नियमित रूप से उनकी प्रगति की निगरानी करे। उन्होंने सुझाव दिया कि विभाग स्तर पर स्वयं मैंटर्स नामित किए जाएँ जो विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम चयन, अध्ययन प्रबंधन एवं परीक्षा पंजीकरण संबंधी मार्गदर्शन प्रदान करें।

उन्होंने आगे कहा कि विश्वविद्यालय में स्वयं के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु निम्न रणनीतियों पर कार्य किया जाएगा—

* विभागवार स्वयं पाठ्यक्रमों का मानचित्रण एवं अनुमोदन।

* UGC विनियमों के अनुसार क्रेडिट ट्रांसफर प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाना।

* विद्यार्थियों की अधिकतम भागीदारी सुनिश्चित करने हेतु जागरूकता अभियान चलाना।

* प्रत्येक विभाग में स्वयं प्रगति की त्रैमासिक समीक्षा करना।

* मूक्स आधारित मिश्रित शिक्षण (ब्लैंडेड लर्निंग ) को कक्षा शिक्षण के साथ जोड़ना।

* कौशल विकास, उद्यमिता, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, संचार, भाषा एवं बहुविषयक विषयों से संबंधित पाठ्यक्रमों को विशेष प्राथमिकता देना।

* एनईपी -2020 के अनुरूप अकादमिक बैंक ऑफ क्रैडिट्स(ABC) के प्रभावी उपयोग को प्रोत्साहित करना।

डॉ. रुचिता सुजई चौधरी ने कहा कि “स्वयं विद्यार्थियों को देश के प्रतिष्ठित शिक्षकों एवं संस्थानों से सीखने का अवसर प्रदान करता है। यदि विभागीय स्तर पर सुनियोजित रणनीति के साथ इसे लागू किया जाए तो यह न केवल विद्यार्थियों की शैक्षणिक गुणवत्ता में वृद्धि करेगा बल्कि उनके रोजगारपरक कौशल, डिजिटल दक्षता और बहुविषयक ज्ञान को भी सशक्त बनाएगा। आगामी सत्र में हमारा प्रयास रहेगा कि विश्वविद्यालय के अधिकाधिक विद्यार्थी स्वयं पाठ्यक्रमों में नामांकन कर क्रेडिट अर्जित करें तथा राष्ट्रीय शिक्षा नीति के उद्देश्यों को साकार करने में भागीदार बनें।”

कार्यशाला के अंत में प्रतिभागियों ने विभागवार कार्ययोजना तैयार करने, संभावित चुनौतियों पर चर्चा करने तथा स्वयं के व्यापक क्रियान्वयन के लिए सहयोगात्मक प्रयास करने का संकल्प लिया।

इस अवसर पर कार्यशाला में श्री सौरभ सिंह , डॉ. सविता सिंह, श्री कार्तिकेय प्रकाश, डॉ. सत्येन्द्र कुमार शुक्ला, डॉ. श्वेता त्रिवेदी, डॉ. बसंत के. वरुण, डॉ. शिप्रा सिंह, डॉ. हिमांशु गंगवार तथा सुश्री तान्या सागर सहित विभिन्न विभागों के शिक्षकों ने सहभागिता की।

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