ICALS-2026 के अंतर्गत “आधुनिक जैविक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला आयोजित

Update: 2026-03-11 11:52 GMT


11 मार्च 2026 को स्कूल ऑफ़ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी, छत्रपति शाहू जी महाराज यूनिवर्सिटी, कानपुर द्वारा इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन एडवांसेज इन लाइफ साइंसेज-2026 (ICALS 2026) के अंतर्गत “आधुनिक जैविक अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता” विषय पर एक प्री-कॉन्फ्रेंस कार्यशाला का सफलतापूर्वक आयोजन किया गया। इस कार्यशाला का उद्देश्य विद्यार्थियों और शोधार्थियों को जैविक एवं जैव-चिकित्सकीय अनुसंधान में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते उपयोग से परिचित कराना था।

कार्यक्रम के आयोजन में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. विनय कुमार पाठक तथा प्रति-कुलपति प्रो. सुधीर के. अवस्थी द्वारा प्रदान की गई प्रेरणा, मार्गदर्शन और सतत समर्थन के लिए आयोजन समिति ने उनका आभार व्यक्त किया। उनके दूरदर्शी नेतृत्व से प्रेरित होकर स्कूल ऑफ लाइफ साइंसेज एंड बायोटेक्नोलॉजी द्वारा इस प्रकार के नवोन्मेषी शैक्षणिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है।

कार्यशाला के उद्घाटन सत्र में प्रो. सुधीर के. अवस्थी (प्रति-कुलपति), डॉ. अनुराधा कलानी (निदेशक, एस.एल.एस.बी.टी.), डॉ. शिल्पा डी. कैस्था (डीन इनोवेशन, सीएसजेएमयू) और प्रोफेसर वर्षा गुप्ता की उपस्थिति रही। अपने संबोधन में प्रो. सुधीर के. अवस्थी ने पंडित दीनदयाल उपाध्यायके विचारों का उल्लेख करते हुए कहा:

“पंडित दीनदयाल उपाध्याय का विचार था कि ज्ञान और विकास का लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचना चाहिए। आज के युग में एआई आधारित शिक्षा और डिजिटल तकनीकों का लाभ भी अंतिम छात्र और शोधार्थी तक पहुँचना चाहिए, तभी तकनीकी प्रगति वास्तव में समावेशी और समाज के लिए उपयोगी सिद्ध होगी।” अपने संबोधन में वक्ताओं ने विद्यार्थियों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विवेकपूर्ण उपयोग के लिए प्रेरित किया तथा बताया कि एआई तकनीक जैविक अनुसंधान, औषधि विकास, जीनोमिक्स और रोग निदान के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रही है। उन्होंने विद्यार्थियों को वैज्ञानिक अनुसंधान में एआई के प्रयोग के साथ-साथ आलोचनात्मक सोच और नैतिक जिम्मेदारी को भी अपनाने का संदेश दिया।

तकनीकी सत्र में प्रो. संजीव कुमार सिंह, विभाग-बायोइन्फॉर्मेटिक्स, अलगप्पा यूनिवर्सिटी, ने AI/ML-बेस्ड ड्रग डिज़ाइन टारगेटिंग वायरस–होस्ट इंटरैक्शन” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने बताया कि मशीन लर्निंग तकनीकों की सहायता से वायरस-होस्ट इंटरैक्शन का विश्लेषण कर संभावित औषधीय लक्ष्यों की पहचान को तेज किया जा सकता है।

इसके पश्चात श्री अरुण प्रवीण, विभाग-बायोइन्फॉर्मेटिक्स, अलगप्पा यूनिवर्सिटी, द्वारा अल्फाफोल्ड टूल का उपयोग करते हुए “वायरल प्रोटीन का एआई-आधारित स्ट्रक्चरल प्रेडिक्शन और मॉलिक्यूलर स्पष्टीकरण” पर हैंड्स-ऑन प्रशिक्षण प्रदान किया गया। इस सत्र में प्रतिभागियों ने प्रोटीन संरचना पूर्वानुमान और उसके विश्लेषण की व्यावहारिक विधियों को सीखा।

अंतिम तकनीकी सत्र में श्री क्षितिज कुमार, इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी, कानपुर, ने “वैज्ञानिक अनुप्रयोगों के लिए प्रॉम्प्ट इंजीनियरिंग” तथा “अनुसंधान स्वचालन के लिए एआई एजेंट विकास” विषयों पर प्रशिक्षण दिया।

इस कार्यशाला में लगभग 100 विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और एआई आधारित बायोइन्फॉर्मेटिक्स उपकरणों के रणनीतिक उपयोग, आलोचनात्मक मूल्यांकन तथा व्यावहारिक अनुप्रयोग के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी प्राप्त की।

कार्यशाला का समन्वयन डॉ. गौरव कुमार और डॉ. दीपेश वर्मा (एस.एल.एस.बी.टी.) द्वारा किया गया। इस अवसर पर डॉ. राजीव मिश्रा एवं डॉ. आलोक पांडे, एसोसिएट डायरेक्टर, एस.एल.एस.बी.टी.के साथ डॉ. विनोद के. वर्मा, डॉ. सोनी गुप्ता, डॉ. एकता खरे तथा एस.एल.एस.बी.टी. के सभी संकाय सदस्य भी उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के समापन पर विद्यार्थियों ने इस प्रकार की कार्यशालाओं के नियमित आयोजन की इच्छा व्यक्त की। संकाय सदस्यों ने आश्वासन दिया कि विद्यार्थियों के कौशल विकास और अनुसंधान क्षमता को बढ़ाने के लिए भविष्य में भी इस प्रकार के प्रशिक्षण कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित किए जाते रहेंगे।

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