कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित अंग्रेज़ी भाषा अधिगम प्रणाली पर डॉ. रुचिता सुजय चौधरी का पेटेंट प्रकाशित

Update: 2026-06-20 12:44 GMT


लखनऊ। ख़्वाजा मुईनुद्दीन चिश्ती भाषा विश्वविद्यालय, लखनऊ के जनसंचार एवं पत्रकारिता विभाग की प्रभारी तथा सहायक आचार्य डॉ. रुचिता सुजय चौधरी सहित 12 अन्य आवेदकों द्वारा विकसित अभिनव आविष्कार “व्यक्तिगत अंग्रेज़ी पठन एवं लेखन कौशल अनुकूलन हेतु अनुकूली अधिगम तकनीकों पर आधारित कृत्रिम बुद्धिमत्ता रूपरेखा” का प्रकाशन भारत सरकार के पेटेंट कार्यालय द्वारा पेटेंट ऑफिस जर्नल संख्या 25/2026, दिनांक 19 जून 2026 में किया गया है।

यह प्रस्तावित आविष्कार अंग्रेज़ी भाषा के पठन एवं लेखन कौशल को प्रत्येक शिक्षार्थी की आवश्यकता के अनुरूप विकसित करने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित एक उन्नत प्रणाली प्रस्तुत करता है। इसमें ट्रांसफॉर्मर आधारित अनुकूली अधिगम मॉडल का उपयोग किया गया है, जो शिक्षार्थियों की पठन-बोध क्षमता, शब्दावली के प्रयोग, व्याकरणिक शुद्धता, वाक्य निर्माण तथा लेखन की तार्किकता और सुसंगतता का विश्लेषण कर उन्हें व्यक्तिगत शिक्षण सुझाव प्रदान करता है।

यह प्रणाली शिक्षार्थी के प्रदर्शन और प्रगति के आधार पर अध्ययन सामग्री, लेखन अभ्यास, व्याकरण संबंधी गतिविधियों तथा शब्दावली विकास कार्यक्रमों को स्वतः अनुकूलित करती है। साथ ही, स्वचालित लेखन मूल्यांकन तथा त्वरित प्रतिपुष्टि (फीडबैक) की सुविधा शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सहभागितापूर्ण और परिणामोन्मुख बनाती है।

यह आविष्कार पारंपरिक शिक्षण पद्धतियों की सीमाओं को कम करते हुए अंग्रेज़ी भाषा दक्षता में वृद्धि, शिक्षण की गुणवत्ता में सुधार तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता एवं प्राकृतिक भाषा संसाधन तकनीकों के माध्यम से स्मार्ट एवं अनुकूली शिक्षा प्रणाली को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण योगदान देगा।

यह कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित प्रणाली विद्यालयों, महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों, ऑनलाइन शिक्षण मंचों तथा भाषा प्रशिक्षण संस्थानों में अंग्रेज़ी भाषा शिक्षण को अधिक प्रभावी और शिक्षार्थी-केंद्रित बनाने में उपयोगी सिद्ध होगी। यह शिक्षार्थियों की व्यक्तिगत सीखने की गति, क्षमता और आवश्यकताओं के अनुसार अध्ययन सामग्री एवं अभ्यास उपलब्ध कराकर उनकी पठन, लेखन, व्याकरण और शब्दावली संबंधी दक्षताओं में सुधार करेगी। विशेष रूप से दूरस्थ शिक्षा, स्व-अध्ययन तथा बहुभाषी शिक्षार्थियों के लिए यह प्रणाली अत्यंत लाभकारी होगी।

इस प्रौद्योगिकी को हिंदी सहित अन्य भारतीय भाषाओं के पठन एवं लेखन कौशल विकास के लिए विस्तारित किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त, वाक् पहचान (स्पीच रिकग्निशन), उच्चारण मूल्यांकन, संवादात्मक चैटबॉट, भाव विश्लेषण तथा जनरेटिव कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण मॉड्यूल को भी इसमें समाहित किया जा सकता है। भविष्य में इस प्रणाली का एकीकरण स्वयम्, दीक्षा तथा अन्य डिजिटल शिक्षा मंचों के साथ कर देश में गुणवत्तापूर्ण एवं समावेशी भाषा शिक्षा को बढ़ावा दिया जा सकता है।

विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर अजय तनेजा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह पेटेंट शिक्षा के क्षेत्र में कृत्रिम बुद्धिमत्ता के अभिनव उपयोग का उत्कृष्ट उदाहरण है। उन्होंने कहा कि इस प्रकार के शोध एवं नवाचार भविष्य की तकनीक-संचालित शिक्षा व्यवस्था को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

उल्लेखनीय है कि डॉ. रुचिता सुजई चौधरी जनसंचार, मीडिया अध्ययन, डिजिटल शिक्षा तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित शिक्षण नवाचारों के क्षेत्र में सक्रिय रूप से कार्य कर रही हैं। उनके द्वारा अब तक नौ पुस्तकें तथा पचास से अधिक शोध-पत्र प्रकाशित किए जा चुके हैं। यह पेटेंट उनकी शैक्षणिक एवं शोध उपलब्धियों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि के रूप में जुड़ गया है।

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